Editorial
Opinion: ..........बाकी सब ठीक है
N
Naresh Kumar
May 20, 2026
58 Views
Opinion: लो जी,यह बिल्कुल शीशे की तरह साफ हो गया है कि कुपोषण का शिकार केवल बच्चे ही नहीं होते बल्कि रुपया भी होता है साहब।अब देखो ना!रुपया निरंतर कमजोर होता जा रहा है और कमजोर होकर इतना गिर रहा है कि शायद बेचारा उठना ही भूल गया है।
Opinion: लो जी,यह बिल्कुल शीशे की तरह साफ हो गया है कि कुपोषण का शिकार केवल बच्चे ही नहीं होते बल्कि रुपया भी होता है साहब।अब देखो ना!रुपया निरंतर कमजोर होता जा रहा है और कमजोर होकर इतना गिर रहा है कि शायद बेचारा उठना ही भूल गया है।गजब तो यह भी है कि देश में ऐसा कोई डॉक्टर फिलवक्त दिखाई नहीं दे रहा जो निरंतर कुपोषित होते हुए रुपये की सेहत में सुधार लाकर दिखा दे।इधर रुपया इतना गिर रहा है कि बस पूछिए मत।अब तो रुपया शतक बनाने की ओर अग्रसर है और रुपये के इस गिरने से फिर सब कुछ गिर रहा है बस अगर कुछ ठीक है तो वह सरकार की सेहत,जो निरंतर फलती और फूलती जा रही है।बाकी सब ठीक है।
इधर साहब का उपदेश आया और उधर एक हफ्ते में ही दो बार पैट्रोल/डीजल के दाम बढ़ गए हैं।जैसे ही दाम बढ़े तो निश्चित रूप से महंगाई ने सुरसा राक्षसी से भी ज्यादा मुँह बा लिया है और लगता है कि मुँह बंद करना ही भूल गई क्योंकि सुरसा राक्षसी के मुँह खुला रहने से आम आदमी,मध्यम वर्ग और किसान-मजदूर का मुँह बंद रहता है क्योंकि मुँह चलाएं तो फिर चलाएं कैसे क्योंकि मुँह चलाने के लिए जेब में दम चाहिए जो बिल्कुल फूल चुका है।बाकी सब ठीक है।
इधर राम जी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ रखी और अपना गर्मी वाला दरवाजा पूरी तरह से खोल दिया है।शायद दरवाजा ही हटा दिया है और धूप लू के साथ आजकल टूर पर निकली है,वह भी पूरे मजे के साथ ताकि घूम-फिरकर देख सके कि आखिर इंसान रहते कैसे हैं?लेकिन जैसे ही वह घूमने निकली तो इंसानों की तो बोलती बंद हो गई क्योंकि बिजली कट है और जलवायु परिवर्तित है जो खुद इंसान ने की है।बाकी सब ठीक है।
अगर आप टीवी देखते हैं और खासकर एंकरों की भाषा,भाव और भंगिमा को देखते समझते हैं तो मेरी एक बात जरूर मान लीजिए कि आप मानसिक रूप से बीमार ही चुके हैं क्योंकि आप सोचने-समझने की शक्ति खो चुके हैं,तर्क आपकी बुद्धि से गधे के सींग की तरह गायब है,जो भी टीवी चैनल आप देख रहे हैं,वह आपको बौद्धिक रूप से गुलाम बना रहा है बस।बाकी सब ठीक है।
अच्छा जी देखो!नीट की परीक्षा लीक होकर डर्टी हो गई।भर्ती निकली थी जल्दी पद भरने के लिए पर उसमें देरी हो गई।कहीं परीक्षा नहीं ली जा रही तो कहीं परिणाम नहीं आ रहे,जहाँ परिणाम आ गए हैं,वहाँ जॉइनिंग नहीं हो रही,बेरोजगारी निरंतर बढ़ रही है,गरीबी का कोई हिसाब नहीं है,शिक्षा व्यवस्था बेहाल,सुरक्षा राम भरोसे है,स्वास्थ्य सेवाएं खुद बीमार होकर वेंटिलेटर पर हैं पर बाकी सब ठीक है।
इधर जब अमेरिका-ईरान और इजरायल का युद्ध शुरू हुआ तो हमारे देश में बहुत सारे कह रहे थे कि विदेश में हो रहे युद्ध से हमें क्या फर्क पड़ता है।तमाम तर्कों के बाद भी मान नहीं रहे थे पर जबसे अपने साहब ने कुछ बयान देने शुरू किए हैं तब से ऐसे लोगों की बोलती बंद हो चुकी है और ऐसे लोग भी कहने लगे हैं कि युद्ध कहीं भी हो,आज के वैश्विक दौर में हर देश पर प्रभाव पड़ता है।बाकी सब ठीक है।
कृष्ण कुमार निर्माण एक स्वतंत्र लेखक हैं।