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Editorial

अनुभव बहुत कुछ सिखाता है व्यक्ति को, इसे नजरअंदाज न करें

अनुभव बहुत कुछ सिखाता है व्यक्ति को, इसे नजरअंदाज न करें
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Naresh Kumar

Aug 08, 2026

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जीवन में अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक है। व्यक्ति प्रत्यक्ष अनुभव, अनुमान और ज्ञान के माध्यम से लगातार सीखता है। बुद्धिमान लोग अपने अनुभवों से सबक लेकर भविष्य की गलतियों से बचते हैं, जबकि मूर्ख वही गलतियां दोहराते रहते हैं। इसलिए अपने अनुभवों से सीखें, निरंतर आगे बढ़ें और जीवन को सुखमय बनाएं।

जीवन में अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक है। व्यक्ति प्रत्यक्ष अनुभव, अनुमान और ज्ञान के माध्यम से लगातार सीखता है। बुद्धिमान लोग अपने अनुभवों से सबक लेकर भविष्य की गलतियों से बचते हैं, जबकि मूर्ख वही गलतियां दोहराते रहते हैं। इसलिए अपने अनुभवों से सीखें, निरंतर आगे बढ़ें और जीवन को सुखमय बनाएं।

अनुभव बहुत कुछ सिखाता है व्यक्ति को

किसी ने ठीक ही कहा है कि-जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुँचे कवि पर किसी ने इसे आगे बढ़ाकर यों कहा कि--जहाँ न पहुँचे कवि,वहाँ पहुँचे अनुभवी। निश्चित रूप से अनुभव से बड़ा कुछ नहीं मगर अनुभव आता अनुभव करने से ही है। बाजार में बहुत सी चीजें रुपए से खरीदी जा सकती हैं, परंतु अनुभव नहीं। वह तो समय खर्च कर के ही प्राप्त किया जा सकता है।

कोई भी व्यक्ति जन्म से विद्वान नहीं होता। यहीं संसार में धीरे-धीरे वह सीखता है और धीरे-धीरे उसका ज्ञान विकसित होता है। अपने ज्ञान का विकास कर के जो लोग उसका लाभ उठाते हैं, वे बुद्धिमान कहलाते हैं। मूर्ख लोग बहुत से दुख भोगने के बाद भी अपने अनुभव से लाभ नहीं उठाते और सदा दुखी होते रहते हैं।

संसार में रोज विभिन्न प्रकार की घटनाएं घटती हैं। बुद्धिमान लोग उन घटनाओं को ध्यान से देखते हैं। उन्हें याद रखते हैं, परखते हैं और उनसे शिक्षा प्राप्त करते हैं। धीरे-धीरे उनके ज्ञान में उन शिक्षाओं का संग्रह बढ़ता जाता है। इसी का नाम अनुभव है। अनुभव अर्थात जो अनुभूति वे कर चुके। जिसे वे देख चुके, प्रत्यक्ष कर चुके, उस ज्ञान का नाम अनुभव है।

इस अनुभव को एक अन्य प्रकार से भी परिभाषित किया जा सकता है। जैसे कि व्यक्ति जो ज्ञान प्राप्त करता है, उसके अनेक साधन हैं। जैसे प्रत्यक्ष प्रमाण, अनुमान प्रमाण, शब्द प्रमाण  इत्यादि। इन अलग-अलग प्रमाणों से व्यक्ति का ज्ञान विकसित होता है। शब्द प्रमाण-जो सत्यवादी ज्ञानी पुरुषों के वचन हैं, उन्हें शब्द प्रमाण कहते हैं। वे सत्यवादी ज्ञानी पुरुष, ईश्वर, ऋषि या आपके माता पिता भी हो सकते हैं।

कोई अध्यापक उपदेशक, विद्वान, राजा, संन्यासी भी हो सकते हैं। अथवा किसी विद्या के विशेषज्ञ जैसे हलवाई, दर्जी, नाई, जुलाहा इत्यादि भी हो सकते हैं। ये लोग भी अपने अपने विषय में विद्वान होते हैं।और जब ये सब सत्य बोलते हैं, तब उनके वचन शब्द प्रमाण कहलाते हैं।

यदि इनमें से कोई व्यक्ति कभी किसी विषय में झूठ बोलता होगा, तो उस के वचन को शब्द प्रमाण नहीं माना जाएगा। इसी प्रकार से लोग बहुत सी बातें अनुमान प्रमाण से जान लेते हैं। धुएं को देखकर अग्नि का अनुमान कर लेते हैं। पुत्र को देखकर पिता का अनुमान कर लेते हैं। बादलों को देखकर वर्षा का अनुमान कर लेते हैं। इससे भी बहुत सा ज्ञान बढ़ता है।

इसके अतिरिक्त प्रत्यक्ष प्रमाण से भी बहुत सा ज्ञान होता है। किसी ने मिर्ची खा कर देखी, उसे तीखी लगी, इसे प्रत्यक्ष प्रमाण कहते हैं। गुड़ खाया, मीठा लगा। इमली खाई, खट्टी लगी। गलती से गर्म तवे पर हाथ रख दिया, वह गरम लगा। पता चल गया कि तवा गरम होता है, हाथ को जला देता है।

ऐसे गर्म तवे से या अग्नि से दूर रहना चाहिए। इन सब प्रमाणों से जो ज्ञान प्राप्त होता है, उनमें प्रत्यक्ष प्रमाण का प्रभाव सबसे बलवान होता है। जिस विषय में किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष अनुभव हो जाता है फिर उस विषय में अन्य किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं रहती। जैसे ऊपर मिर्ची आदि के प्रत्यक्ष प्रमाण का उदाहरण दिया है।

शब्द प्रमाण एवं अनुमान प्रमाण से जो ज्ञान होता है, उसका प्रभाव कमजोर होता है। उतने से व्यक्ति को पूर्ण विश्वास नहीं हो पाता। उसी विषय में जब प्रत्यक्ष हो जाता है फिर उसे पूरी जिज्ञासा निवृत्त हो जाती है और पूरी तृप्ति हो जाती है। इसलिए प्रत्यक्ष प्रमाण का प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है। धीरे-धीरे समय बीतता जाता है और व्यक्ति अपने जीवन में बहुत सी चीजों का प्रत्यक्ष कर लेता है। उसके प्रत्यक्ष से जो ज्ञान का संग्रह बनता है,उसे अनुभव कहते हैं। वह अनुभव अगली गलती से व्यक्ति को बचाता है।

बुद्धिमान लोग अपने पूर्व अनुभव से लाभ उठा कर अगली गलतियों से बच जाते हैं,दुखों से बच जाते हैं। मूर्ख लोग अपने अनुभव से लाभ नहीं उठाते, लापरवाही करते हैं और भविष्य में भी वे वही गलतियां दोहराते रहते हैं, जिन गलतियों को करके उन्होंने भूतकाल में बहुत सी हानियां और दुख प्राप्त किया था। अत: बुद्धिमानों की नकल करें, मूर्खों की नहीं। अपने अनुभव से लाभ उठाएं। उसकी उपेक्षा न करें। तभी आप दुखों से बच पाएंगे और अपने जीवन को सुखमय बना पाएंगे। आइए! क्यों ना जीवन में निरंतर सीखते रहें, आगे बढ़ते रहें।

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