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Petrol-Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर तेल कंपनियों के बड़े संकेत: 'एक साथ नहीं डाल सकते बोझ, धीरे-धीरे बढ़ेंगे दाम'—जानें क्या है IOCL का पूरा प्लान?

Petrol-Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर तेल कंपनियों के बड़े संकेत: 'एक साथ नहीं डाल सकते बोझ, धीरे-धीरे बढ़ेंगे दाम'—जानें क्या है IOCL का पूरा प्लान?
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Naresh Kumar

May 19, 2026

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Petrol-Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी। IOCL ने दिए संकेत कि उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए धीरे-धीरे बढ़ेंगे दाम। जानें क्या है तेल कंपनियों का प्लान।

Petrol-Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 दिन के भीतर दूसरी बार हुई बढ़ोतरी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। मंगलवार को तेल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया। इस दोहरी मार के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या साल 2022 की तरह कीमतें रोज बढ़ेंगी? इस पर देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल (IOCL) ने स्थिति साफ की है।

धीरे-धीरे बढ़ेंगी कीमतें: IOCL का तर्क

एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेतों में बताया कि कंपनी उपभोक्ताओं पर एक साथ बड़ा आर्थिक बोझ नहीं डालना चाहती। महंगाई को काबू में रखने के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें किस्तों (Gradually) में बढ़ाई जा रही हैं। अधिकारी के अनुसार, "हम उपभोक्ताओं को बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण बढ़ोतरी जरूरी हो गई है।"

क्या फिर से दोहराया जाएगा 2022 का दौर?

याद दिला दें कि मार्च-अप्रैल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान तेल कंपनियों ने लगातार 13 दिनों तक दाम बढ़ाए थे, जिससे 15 दिनों में पेट्रोल-डीजल 10 रुपये तक महंगा हो गया था। जब IOCL अधिकारी से पूछा गया कि क्या वही सिलसिला फिर शुरू होगा, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई निश्चित आंकड़ा तय नहीं है, लेकिन वेस्ट एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव के कारण लागत तेजी से बढ़ रही है।

महंगाई बढ़ने का बड़ा जोखिम

चार साल बाद शुरू हुए इस बढ़ोतरी के सिलसिले से महंगाई का ग्राफ बढ़ना तय है। एक अनुमान के मुताबिक, तेल की कीमतों में इस इजाफे से जून महीने की CPI महंगाई में 15 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका है। इससे कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि वे तिमाही मुनाफे के बजाय उपभोक्ताओं को बचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन कच्चे तेल का बढ़ता दाम उनके नियंत्रण से बाहर है।

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