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पुरी रथ यात्रा के तीनों रथों के पहिए राष्ट्रपति भवन में होंगे प्रदर्शित

पुरी रथ यात्रा के तीनों रथों के पहिए राष्ट्रपति भवन में होंगे प्रदर्शित
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Naresh Kumar

Aug 04, 2026

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पुरी की वार्षिक रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाले भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष, भगवान बलभद्र के तालध्वज और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथों के पहिए राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किए जाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह ओडिशा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का गौरवपूर्ण प्रतीक बनेगा।

पुरी की वार्षिक रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाले भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष, भगवान बलभद्र के तालध्वज और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथों के पहिए राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किए जाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह ओडिशा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का गौरवपूर्ण प्रतीक बनेगा।

 
पुरी रथ यात्रा के रथ के पहिए राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किए जाएंगे
 
भुवनेश्वर, चार अगस्त (भाषा) पुरी की वार्षिक रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाले तीनों रथों के पहिए राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किए जाएंगे। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
 
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि उन्होंने भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उनके समक्ष यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने एक बयान में कहा, ''राष्ट्रपति इस बात पर सहमत हो गईं कि तीनों रथों के पहिये राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किए जाएं। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।''
 
अधिकारियों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ के 'नंदीघोष', भगवान बलभद्र के 'तालध्वज' और देवी सुभद्रा के 'दर्पदलन' रथों के पहियों को नयी दिल्ली भेजा जाएगा और ओडिशा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के स्थायी प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।
 
उन्होंने बताया कि वार्षिक रथयात्रा के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले तीनों रथों को हर साल उत्सव के बाद खोल दिया जाता है। जहां लकड़ी का एक हिस्सा जगन्नाथ मंदिर की रसोई में इस्तेमाल होता है, वहीं रथों के महत्वपूर्ण हिस्सों की श्रद्धालुओं के बीच नीलामी की जाती है। उन्होंने बताया कि उत्सव के लिए नए रथों के निर्माण के वास्ते हर साल नयी लकड़ी का उपयोग किया जाता है।
 
यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा की विरासत को राष्ट्रपति भवन परिसर में जगह मिलने जा रही है।अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले 29 अक्टूबर 2024 को प्रतिष्ठित कोणार्क पहियों की बलुआ पत्थर से बनी चार प्रतिकृतियों को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र और अमृत उद्यान में प्रदर्शित किया गया था, ताकि आगंतुकों के सामने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा सके।
 
 
 

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