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Mathura Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्मभूमि में आधी रात गूंजे जयकारे, धूमधाम से मनाया जन्मोत्सव
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Naresh Kumar
Sep 05, 2026
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मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आधी रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। ढोल-नगाड़ों के बीच महाआरती और दूध-दही-शहद से महाभिषेक हुआ।
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आधी रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। ढोल-नगाड़ों के बीच महाआरती और दूध-दही-शहद से महाभिषेक हुआ।

मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया
मथुरा (उप्र), भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में उनका जन्मोत्सव धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा समिति के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि शुक्रवार आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, करताल, मृदंग और 'हरिबोल' के जयघोष से गूंज उठा। भगवान के जन्म का उत्सव मनाते हुए श्रद्धालु नृत्य करने लगे।
उन्होंने बताया कि रात 12 बजकर 10 मिनट तक महाआरती हुई।
केसर और अन्य सुगंधित पदार्थों से अभिषिक्त श्रीकृष्ण की चल प्रतिमा को चांदी के सूप में विराजमान कर अभिषेक स्थल पर लाया गया।
उन्होंने बताया कि ठाकुर जी का पहला अभिषेक कामधेनु गाय के थन से किया गया। यह गाय चांदी से निर्मित है, जिस पर सोने की परत तथा 33 कोटि देवताओं के चित्र अंकित हैं।
शर्मा ने बताया कि इसके बाद चांदी के कमल पर विराजमान ठाकुर जी का दूध, दही, शहद, घी और बूरा से महाभिषेक किया गया।
उन्होंने बताया कि श्री राम जन्मभूमि और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से आए उपहार एवं प्रसाद भी भगवान को अर्पित किए गए।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा समिति के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि ठाकुर जी ने पंचरत्नी पोशाक धारण की जिस पर समुद्र मंथन से निकले पांच रत्नों—कामधेनु गाय, पंचजन्य शंख, अमृत कलश, ऐरावत हाथी और कल्पवृक्ष की कढ़ाई की गई है।
ठाकुर जी रत्नजड़ित मुकुट, बांसुरी और नवरत्न हार भी धारण किए हुए थे।
इससे पहले श्रीगणेश और नवग्रहों की पूजा की गई। मंदिर प्रशासन ने जन्मोत्सव के लिए महाकाल की नगरी उज्जैन से पखावज और मृदंग वादकों को भी आमंत्रित किया था।
चतुर्वेदी ने बताया कि रात 12 बजकर 45 मिनट पर शृंगार आरती की गई।