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सैन्य AI के खतरों पर संयुक्त राष्ट्र की नई पहल, मानव नियंत्रण पर चिंता

सैन्य AI के खतरों पर संयुक्त राष्ट्र की नई पहल, मानव नियंत्रण पर चिंता
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Naresh Kumar

Oct 21, 2026

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सैन्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल और परमाणु सुरक्षा पर मंडराते जोखिमों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मंच शुरू करेगा।

सैन्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल और परमाणु सुरक्षा पर मंडराते जोखिमों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मंच शुरू करेगा।

संयुक्त राष्ट्र। सैन्य क्षेत्र में कृत्रिम मेधा (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से पैदा होने वाले जोखिमों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल शुरू करने जा रहा है। इसका उद्देश्य तेजी से विकसित हो रही इस तकनीक से मानवता के सामने खड़े गंभीर खतरों को समझना और उनके समाधान के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाना है।

सैन्य AI पर चर्चा के लिए बनेगा अंतरराष्ट्रीय मंच

संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण अनुसंधान संस्थान (UNIDIR) की यह पहल बृहस्पतिवार से औपचारिक रूप से शुरू होगी। इसके तहत सैन्य क्षेत्र में AI के इस्तेमाल से जुड़े प्रमुख पक्षों को एक मंच पर लाकर संभावित जोखिमों पर चर्चा करने और मिलकर समाधान तलाशने का अवसर मिलेगा।

UNIDIR के प्रमुख रोबिन गेइस ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के संवाददाता सम्मेलन में चेतावनी दी कि परमाणु क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मानवीय निर्णय लेने की गुंजाइश लगातार कम होती जा रही है।

मशीनों पर मानवीय नियंत्रण को लेकर बढ़ी चिंता

गेइस ने कहा कि यह आकलन करना मुश्किल है कि दुनिया ऐसी स्थिति के कितने करीब है, जहां मशीनें मानवीय नियंत्रण से बाहर होकर काम करने लगें। उनके मुताबिक, यही अनिश्चितता इस पहल के केंद्र में है।

उन्होंने बताया कि शुरुआती चेतावनी प्रणालियों, खुफिया जानकारी जुटाने और निगरानी जैसी गतिविधियों में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यह तय करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है कि किस बिंदु पर मानवीय नियंत्रण कमजोर पड़ने लगता है।

AI की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बड़ी चुनौती

गेइस के अनुसार, सैन्य AI के इस्तेमाल पर सुरक्षा संबंधी नियम और सीमाएं तय करने में लंबे समय तक पर्याप्त प्रगति नहीं हुई। लेकिन इस तकनीक की बढ़ती क्षमताओं और उसके संभावित प्रभावों ने अब ठोस कदम उठाने की जरूरत को और स्पष्ट कर दिया है।

उन्होंने स्वीकार किया कि AI के क्षेत्र में अग्रणी बनने की वैश्विक प्रतिस्पर्धा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के रास्ते में बड़ी बाधा है। हालांकि, AI के संभावित खतरों को लेकर चिंता अब केवल किसी एक भू-राजनीतिक गुट तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रमुख शक्तियां भी इस दिशा में कदम उठाने पर विचार कर रही हैं।

अमेरिका-चीन के बीच भी चेतावनी प्रणाली पर चर्चा

गेइस ने पिछले महीने अमेरिका और चीन के बीच AI से जुड़े ऐसे मामलों के लिए चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के प्रस्ताव का उल्लेख किया, जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक उच्चस्तरीय बैठक में पिछले महीने 193 सदस्य देशों में से कई देशों के नेताओं ने अपने संबोधनों में AI से जुड़े जोखिमों को प्रमुखता से उठाया था। ऐसे में सैन्य क्षेत्र में AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियम बनाने और सहयोग बढ़ाने की मांग तेज होती दिखाई दे रही है।

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