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भारत-चीन व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार, निर्यात बढ़ने के बावजूद बढ़ा अंतर

भारत-चीन व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार, निर्यात बढ़ने के बावजूद बढ़ा अंतर
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Naresh Kumar

Oct 14, 2026

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भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 105.93 अरब डॉलर पहुंचा। चीन को भारतीय निर्यात 40.7 प्रतिशत बढ़ा, फिर भी आयात का दबाव बरकरार रहा।

भारत-चीन व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार, निर्यात में 40.7 प्रतिशत बढ़ोतरी के बावजूद बढ़ी चिंता

बीजिंग, 14 अक्टूबर। भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा इस साल के पहले नौ महीनों में 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। हालांकि, इस दौरान भारत का चीन को निर्यात 40.7 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन चीन से आयात में लगातार तेज वृद्धि के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन और बढ़ गया है।

चीन के सीमा शुल्क सामान्य प्रशासन की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 20.7 प्रतिशत बढ़कर 105.93 अरब डॉलर हो गया। यह बढ़ोतरी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले दर्ज की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर के दौरान भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 25.4 प्रतिशत बढ़कर 144.45 अरब डॉलर पहुंच गया। दोनों देशों के बीच व्यापार में वृद्धि के बावजूद भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ना एक महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दा बना हुआ है।

इस अवधि में चीन का भारत को निर्यात 23.3 प्रतिशत बढ़कर 125.19 अरब डॉलर रहा। वहीं, भारत का चीन को निर्यात 40.7 प्रतिशत बढ़कर 19.26 अरब डॉलर हो गया। आंकड़े बताते हैं कि भारत के निर्यात में तेज वृद्धि होने के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार का अंतर काफी बड़ा बना हुआ है।

चीन से भारत आने वाले उत्पादों में इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और रसायनों की प्रमुख हिस्सेदारी है। इन उत्पादों का उपयोग भारत के विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

दूसरी ओर, भारत से चीन को निर्यात होने वाले उत्पादों में अयस्क, ईंधन, समुद्री खाद्य उत्पाद और कृषि जिंस शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से प्राथमिक वस्तुओं और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े उत्पादों की हिस्सेदारी अधिक है।

दोनों देशों के व्यापार आंकड़ों की गणना की अवधि भी अलग-अलग है। चीन अपने व्यापार संबंधी आंकड़े जनवरी से दिसंबर तक के कैलेंडर वर्ष के आधार पर तैयार करता है, जबकि भारत में वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक माना जाता है।

भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर रहा था। यह आंकड़ा भारत और चीन के बीच व्यापक व्यापारिक संबंधों को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का चीन को निर्यात 36.66 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि चीन से भारत का आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर पहुंच गया।

इस दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर हो गया। इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह घाटा 99.2 अरब डॉलर था। इस प्रकार चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ने की स्थिति सामने आई है।

भारत कई वर्षों से चीन से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), दवा और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में अपने उत्पादों के लिए बाजार खोलने की मांग करता रहा है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें भारत की मजबूत प्रतिस्पर्धी स्थिति मानी जाती है।

हालांकि, इन क्षेत्रों में चीन के बाजार तक भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों को अब तक सीमित सफलता मिली है। दोनों देशों के बीच निर्यात और आयात में बड़ा अंतर भारत के लिए व्यापार संतुलन से जुड़ी चुनौती बना हुआ है।

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