Social Media :सोशल मीडिया पर ADHD और ऑटिज्म की चर्चा बढ़ी, अध्ययन में बड़ा खुलासा
Naresh Kumar
Jun 01, 2026
Social Media : रेडिट की 1.4 करोड़ पोस्ट के विश्लेषण में सामने आया बदलाव, अवसाद और चिंता की जगह न्यूरोडाइवर्जेंट स्थितियों पर बढ़ा फोकस
एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पता चला है कि सोशल मीडिया पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चर्चाओं का फोकस अब अवसाद और चिंता जैसे पारंपरिक मानसिक विकारों से हटकर ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) और ऑटिज्म जैसी न्यूरोडाइवर्जेंट स्थितियों की ओर बढ़ रहा है।
शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट की 1.4 करोड़ से अधिक पोस्ट और टिप्पणियों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सहायता के लिए पहले से अधिक सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं।
अध्ययन के अनुसार, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म पर ADHD, ऑटिज्म, टॉरेट सिंड्रोम और डिस्लेक्सिया जैसे विषय तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। टिकटॉक पर ADHD से जुड़े कंटेंट को 50 अरब से अधिक बार देखा जा चुका है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बढ़ती जागरूकता से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में मौजूद कलंक कम हो सकता है और लोगों को सही मदद लेने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, इसके साथ गलत और भ्रामक जानकारी का खतरा भी बढ़ा है।
अध्ययन में पाया गया कि 2015 में रेडिट पर अवसाद और चिंता से जुड़े समुदाय सबसे अधिक सक्रिय थे, लेकिन 2022 तक ADHD और ऑटिज्म से जुड़े समूह सबसे प्रभावशाली बन गए। इन विषयों पर चर्चा करने वाले समुदाय अब मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क के केंद्र में आ चुके हैं।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर मौजूद गलत जानकारी के कारण कुछ लोग अपने लक्षणों को गलत तरीके से ADHD या ऑटिज्म से जोड़ सकते हैं। इससे सही निदान और उपचार में देरी हो सकती है तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया जागरूकता बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए विशेषज्ञों की सलाह लेना भी उतना ही जरूरी है।