असम में 204 साल बाद मिली दुर्लभ फूलदार झाड़ी, वैज्ञानिक भी हैरान
Naresh Kumar
Oct 20, 2026
असम के बोंगाईगांव जिले में 204 साल बाद दुर्लभ आर्डिसिया कोलोराटा की दोबारा खोज हुई। अभयपुरी में मिले सिर्फ 12 नमूनों ने इसके संरक्षण का महत्व बढ़ा दिया है।

गुवाहाटी। असम के बोंगाईगांव जिले में 204 साल से अधिक समय बाद दुर्लभ फूलदार झाड़ी ‘आर्डिसिया कोलोराटा’ (Ardisia colorata) को फिर से खोजा गया है। राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।
2020 से 2025 के बीच हुआ महत्वपूर्ण शोध
मंत्री के अनुसार, गुवाहाटी विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं मानस बरुआ और नीलाक्षी देवी ने 2020 से 2025 के बीच असम में किए गए वनस्पति सर्वेक्षणों के दौरान अभयपुरी क्षेत्र में इस प्रजाति की दोबारा पहचान की।
बरुआ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि करीब 204 वर्षों में भारत से इस प्रजाति के मिलने का यह पहला पुष्ट मामला है। शोधकर्ताओं ने इस पौधे को इससे मिलती-जुलती दूसरी प्रजाति से अलग पहचानने के लिए इसके फूलों, पत्तियों और ऐतिहासिक विवरणों का विस्तृत अध्ययन किया।
1821 में पहली बार दर्ज हुआ था पौधे का विवरण
मंत्री ने बताया कि ब्रिटिश बागवानी विशेषज्ञ जॉर्ज लोडिजेस ने वर्ष 1821 में पहली बार इस पौधे का विवरण दिया था। इसके बाद भारतीय वनस्पति साहित्य में इसका उल्लेख लगभग गायब हो गया था।
शोधकर्ताओं के निष्कर्ष वनस्पति विज्ञान की पत्रिका ‘फेडेस रेपर्टोरियम’ (Feddes Repertorium) में प्रकाशित हुए हैं। मंत्री के मुताबिक, इस शोध से पौधे के वैज्ञानिक नामकरण को लेकर लंबे समय से चली आ रही भ्रम की स्थिति स्पष्ट करने में भी मदद मिली है।
केवल 12 नमूने मिले, प्राकृतिक आवास की सुरक्षा जरूरी
शोधकर्ताओं को अभयपुरी क्षेत्र में इस पौधे के केवल 12 नमूने मिले। यह सीमित संख्या इसकी दोबारा खोज के वैज्ञानिक महत्व के साथ-साथ इसके प्राकृतिक आवास की रक्षा की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
आर्डिसिया कोलोराटा एक सदाबहार झाड़ी है, जो छायादार और नम वन क्षेत्रों में उगती है। इसमें गुलाबी, लालिमा लिए हुए या बैंगनी रंग के फूल आते हैं।
जयंत मल्ला बरुआ ने इस खोज को असम के शोध समुदाय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह खोज याद दिलाती है कि जंगलों में आज भी ऐसी कई प्राकृतिक कहानियां छिपी हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना जरूरी है।