Padma Shri 2026: बस कंडक्टर ने चढ़ने से रोका, पिता ने 2 महीने की सैलरी से खरीदी किट... ऐसे बनीं भारत की 'ग्रेट वॉल' सविता पूनिया
Naresh Kumar
Jun 19, 2026
Padma Shri 2026: सिरसा की बेटी सविता पूनिया को पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया। जानिए कैसे पिता की दो महीने की सैलरी से खरीदी गई किट और संघर्षों के बीच उन्होंने भारतीय हॉकी की 'ग्रेट वॉल' बनने तक का सफर तय किया।
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लेखक : अजीत सिंह सेशमा | 19 जून 2026
सिरसा। भारतीय महिला हॉकी की दिग्गज गोलकीपर और पूर्व कप्तान सविता पूनिया को वर्ष 2026 में देश के प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। लेकिन आज जिस खिलाड़ी को पूरी दुनिया 'द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' के नाम से जानती है, उसका यहां तक पहुंचने का सफर संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प से भरा रहा है।
हरियाणा के सिरसा जिले के जोधकां गांव की रहने वाली सविता पूनिया ने अपने शानदार खेल से भारतीय महिला हॉकी को वैश्विक पहचान दिलाई है। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया है।
पिता ने दो महीने की सैलरी खर्च कर खरीदी थी गोलकीपिंग किट
सविता पूनिया ने वर्ष 2003 में अपने दादा स्वर्गीय रणजीत सिंह की प्रेरणा से हॉकी खेलना शुरू किया था। उस समय गोलकीपर बनने के लिए जरूरी किट काफी महंगी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन उनकी प्रतिभा को देखते हुए उनके पिता ने अपनी दो महीने की सैलरी यानी लगभग 20 हजार रुपये खर्च कर उनके लिए गोलकीपिंग किट खरीदी।
यह वही फैसला था जिसने भारतीय हॉकी को भविष्य की एक महान गोलकीपर दी।
जब बस कंडक्टर भी करते थे ताने
सविता का संघर्ष केवल मैदान तक सीमित नहीं था। सिरसा में ट्रेनिंग के लिए जाते समय उन्हें अपनी भारी गोलकीपिंग किट लेकर बसों में सफर करना पड़ता था। कई बार बस कंडक्टर उन्हें बस में चढ़ने से मना कर देते थे या बड़ी किट को लेकर ताने सुनने पड़ते थे।
लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया। लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने महज 17-18 साल की उम्र में भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बना ली।
कैसे मिला 'द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' का खिताब?
टोक्यो ओलंपिक 2020 भारतीय महिला हॉकी के इतिहास का सबसे यादगार अध्याय रहा। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में भारत ने 1-0 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
इस मैच में सविता पूनिया ने 8 पेनल्टी कॉर्नर सहित कुल 9 शानदार गोल बचाए और ऑस्ट्रेलिया को एक भी गोल नहीं करने दिया।
उनके इस असाधारण प्रदर्शन को देखकर भारत में ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन उच्चायुक्त बैरी ओ'फेरल ने उन्हें "The Great Wall of India" कहा। इसके बाद यही नाम उनकी पहचान बन गया।
लगातार तीन बार बनीं दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर
सविता पूनिया ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे भारतीय महिला हॉकी में आज तक कोई नहीं बना पाया।
वह FIH Goalkeeper of the Year पुरस्कार लगातार तीन बार जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।
- 2021-22 – FIH Goalkeeper of the Year
- 2022-23 – FIH Goalkeeper of the Year
- 2023-24 – FIH Goalkeeper of the Year
यह उपलब्धि उन्हें विश्व हॉकी के महान गोलकीपर्स की श्रेणी में खड़ा करती है।
300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी
फरवरी 2025 में नीदरलैंड्स के खिलाफ मुकाबले में सविता पूनिया ने अपने करियर का 300वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेला।
इसके साथ ही वह:
- वंदना कटारिया के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।
- पीआर श्रीजेश के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनीं।
प्रमुख उपलब्धियां और सम्मान
पद्म श्री (2026)
खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित।
अर्जुन पुरस्कार (2018)
हॉकी में शानदार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के लिए मिला सम्मान।
FIH Goalkeeper of the Year
लगातार तीन बार दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर चुनी गईं।
प्रमुख टूर्नामेंट और पदक
🏅 टोक्यो ओलंपिक 2020
- भारत का ऐतिहासिक चौथा स्थान
- ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के खिलाफ मैच जिताऊ प्रदर्शन
🏅 महिला एशिया कप 2017
- स्वर्ण पदक
- फाइनल में चीन के खिलाफ निर्णायक बचाव
🏅 FIH नेशन्स कप 2022
- स्वर्ण पदक
- कप्तान के रूप में टीम का नेतृत्व
🏅 एशियाई खेल 2018
- रजत पदक
🏅 राष्ट्रमंडल खेल 2022
- कांस्य पदक
🏅 महिला एशिया कप 2013
- कांस्य पदक
- शूटआउट में दो अहम गोल बचाए
अब 2028 ओलंपिक पर नजर
वर्तमान में सविता पूनिया Soorma Hockey Club के लिए खेल रही हैं। उनका अगला बड़ा लक्ष्य भारतीय महिला हॉकी टीम को एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक दिलाना और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालीफाई कराना है।
सविता पूनिया की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, परिवार के त्याग और सपनों को सच करने की प्रेरणादायक मिसाल है।