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Gurdwara News: पाकिस्तान में 125 साल पुराना ऐतिहासिक गुरुद्वारा ढहाया गया, भारत ने जताया कड़ा विरोध

Gurdwara News: पाकिस्तान में 125 साल पुराना ऐतिहासिक गुरुद्वारा ढहाया गया, भारत ने जताया कड़ा विरोध
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Naresh Kumar

Jul 03, 2026

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Gurdwara News: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फ़ारूकाबाद में 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को कथित तौर पर बिना अनुमति ढहा दिया गया। भारत ने घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए निष्पक्ष जांच और जल्द पुनर्निर्माण की मांग की है।

Gurdwara News: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फ़ारूकाबाद में 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को कथित तौर पर बिना अनुमति ढहा दिया गया। भारत ने घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए निष्पक्ष जांच और जल्द पुनर्निर्माण की मांग की है।

Gurdwara News: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फ़ारूकाबाद में स्थित लगभग 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को कथित तौर पर बिना सरकारी अनुमति के ढहा दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय सिख समुदाय में भारी नाराजगी देखने को मिली और लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। यह गुरुद्वारा सिख इतिहास और आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था।

बिना अनुमति गिराने का आरोप

 एक स्थानीय कारोबारी ने आवश्यक एनओसी (No Objection Certificate) लिए बिना गुरुद्वारे को ध्वस्त करा दिया। घटना सामने आने के बाद स्थानीय सिख समुदाय ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

भारत सरकार ने जताया कड़ा विरोध

इस घटना पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंत्रालय ने इसे "बेहद निंदनीय" और "पूजा स्थल के खिलाफ लक्षित तोड़फोड़" बताया। भारत ने पाकिस्तान सरकार से निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ऐतिहासिक गुरुद्वारे के जल्द पुनर्निर्माण की मांग की है।

पाकिस्तान सरकार ने दिए जांच के आदेश

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गुरुद्वारा किन परिस्थितियों में गिराया गया और इसमें किसकी जिम्मेदारी है।

धार्मिक विरासत की सुरक्षा पर उठे सवाल

यह घटना केवल एक धार्मिक स्थल के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। किसी भी धर्म के पूजा स्थल उसकी आस्था, इतिहास और पहचान का प्रतीक होते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना हर देश की जिम्मेदारी है।

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