Digital Arrest Fraud : डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई बुजुर्ग महिला, ठगे ₹24 करोड़; पुलिस ने 6 आरोपियों को दबोचा
Naresh Kumar
May 25, 2026
Digital Arrest Fraud : बेंगलुरु साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: CBI और ED अधिकारी बनकर डराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, ₹4 करोड़ से ज्यादा बचाए
साइबर ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर बेंगलुरु की एक 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला से 24 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड ठगी को अंजाम दिया है। कर्नाटक राज्य साइबर कमांड ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए देश के अलग-अलग राज्यों से 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ठगों ने खुद को सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) का अफसर बताकर महिला को डराया और करोड़ों रुपये ऐंठ लिए।
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26 बार में ट्रांसफर किए 24 करोड़ रुपये :
पुलिस के मुताबिक, यह पूरी धोखाधड़ी इस साल 10 फरवरी से 24 अप्रैल के बीच हुई। ठगों ने बुजुर्ग महिला को इतना डरा दिया था कि उन्होंने अपने बैंक खाते से 26 बार में कुल 24 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह रकम देशभर के 10 अलग-अलग बैंकों में खुले 23 फर्जी (म्यूल) खातों में भेजी गई थी।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा :
24 अप्रैल को जब बैंक को महिला के खाते से बार-बार होने वाले संदिग्ध लेन-देन (Transactions) पर शक हुआ, तो उन्होंने तुरंत साइबर कमांड यूनिट को इसकी सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़िता को समझाया और उन्हें ठगों के चंगुल से बचाते हुए आगे की रकम ट्रांसफर होने से रोक ली।
पुलिस ने बचाए 4 करोड़ रुपये, 6 मोबाइल ज़ब्त :
बेंगलुरु साइबर कमांड के पुलिस महानिदेशक प्रणव मोहंती ने बताया कि पुलिस टीम ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल की मदद से उन फर्जी बैंक खातों को तुरंत फ्रीज (Freeze) कर दिया, जिनमें पैसे भेजे गए थे। पुलिस ने ₹4 करोड़ से ज़्यादा की रकम को सुरक्षित बचा लिया है, जबकि अदालती आदेशों के ज़रिए करीब ₹1.5 करोड़ वापस भी मिल चुके हैं। पकड़े गए आरोपियों के पास से ठगी में इस्तेमाल हुए 6 मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम:
· एन. शिवज्ञानम (इरोड, तमिलनाडु)
· अक्काच मल्लिक (मुंबई, महाराष्ट्र)
· पलक भाई पटेल और अमित नरेंद्र पटेल (अहमदाबाद, गुजरात)
· ओम प्रकाश राजपूत (नई दिल्ली)
· गौरव कुमार (बिहार)
क्या होता है 'डिजिटल अरेस्ट'?
'डिजिटल अरेस्ट' साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या कस्टम अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ित को ऑडियो या वीडियो कॉल (जैसे WhatsApp या Skype) करके डराते हैं कि उन्होंने कोई गंभीर अपराध या गैरकानूनी काम किया है। इसके बाद वे पीड़ित को कैमरे के सामने रहने और किसी से बात न करने की धमकी देकर घर में ही 'डिजिटल रूप से बंधक' बना लेते हैं और मामला रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं।