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राजस्थान के बारां में ‘मिशन सामर्थ्य’ से बदली ग्रामीण स्कूलों की पढ़ाई, छात्रों को मिल रहीं स्मार्ट क्लास की सुविधाएं

राजस्थान के बारां में ‘मिशन सामर्थ्य’ से बदली ग्रामीण स्कूलों की पढ़ाई, छात्रों को मिल रहीं स्मार्ट क्लास की सुविधाएं
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Naresh Kumar

Sep 03, 2026

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बारां में ‘मिशन सामर्थ्य-समर्थ युवा’ के तहत ग्रामीण सरकारी स्कूलों में स्मार्ट पढ़ाई शुरू हुई है। 11 केंद्रों पर करीब 500 विद्यार्थियों को लाइव कक्षाएं, अंग्रेजी, सामान्य अध्ययन, करियर मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिल रही है।

बारां में ‘मिशन सामर्थ्य-समर्थ युवा’ के तहत ग्रामीण सरकारी स्कूलों में स्मार्ट पढ़ाई शुरू हुई है। 11 केंद्रों पर करीब 500 विद्यार्थियों को लाइव कक्षाएं, अंग्रेजी, सामान्य अध्ययन, करियर मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिल रही है।

 
राजस्थान के बारां में 'मिशन सामर्थ्य' से ग्रामीण स्कूलों में पढ़ाई की आधुनिक व्यवस्था कोटा, राजस्थान के बारां जिले में ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन और एनटीपीसी की संयुक्त पहल 'मिशन सामर्थ्य-समर्थ युवा' के तहत सरकारी स्कूलों में 'स्मार्ट पढ़ाई' की व्यवस्था शुरू की गई है।
 
इस कार्यक्रम के तहत बारां के सभी आठ ब्लॉकों के 12 उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 'सामर्थ्य केंद्र' के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया था। इनमें से 11 केंद्र फिलहाल काम कर रहे हैं और 15 अगस्त से यहां नियमित रूप से संवादात्मक शैक्षणिक कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
 
बारां के जिलाधिकारी बालमुकुंद असावा के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को शहरों जैसी शैक्षणिक सुविधाएं और मार्गदर्शन उनके अपने क्षेत्र में उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था के तहत पुराने सिविल लाइन क्षेत्र में श्रीराम स्टेडियम के पास स्थित सरकारी बालिका विद्यालय में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। यहां से शिक्षक एक साथ जुड़े स्कूलों में सीधे ऑनलाइन कक्षाएं लेते हैं।
 
एनटीपीसी ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) योजना के तहत इस पहल में सहयोग किया है। इसके लिए तेज इंटरनेट, निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था, समर्पित लीज लाइन और वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसी सुविधाएं स्थापित की गई हैं।
 
यह डिजिटल व्यवस्था केवल सामान्य पाठ्यक्रम की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए एक ही स्थान से कई स्कूलों में एक साथ 'लाइव' कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
 
पाठ्यक्रम में सामान्य अध्ययन, अंग्रेजी बोलने का अभ्यास, अंग्रेजी व्याकरण और समय-समय पर करियर संबंधी मार्गदर्शन भी शामिल किया गया है।
 
जिला सूचना अधिकारी पूनम पाटनी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''प्रत्येक स्कूल में कम से कम 25 विद्यार्थियों का समूह रखने का लक्ष्य है। आठ ब्लॉकों में शुरू में चुने गए 12 स्कूलों में से 11 केंद्र मौजूदा धनराशि के आधार पर पूरी तरह संचालित हो रहे हैं।''
 
जिलाधिकारी असावा ने बताया कि रोजाना 45-45 मिनट की दो कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कक्षाओं की भी व्यवस्था है।
 
उन्होंने कहा कि फिलहाल 11 केंद्रों में करीब 500 विद्यार्थी नामांकित हैं। प्रत्येक केंद्र में करीब 30 विद्यार्थियों के समूह बनाए गए हैं। श्रव्य-दृश्य व्यवस्था के जरिए सामान्य अध्ययन, अंग्रेजी व्याकरण और करियर मार्गदर्शन की कक्षाएं एक ही स्थान से संचालित की जा रही हैं।
 
असावा ने कहा कि कक्षा 10 से 12 तक की छात्राओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और करियर के समान अवसर मिल सकें।

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