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UDISE Report 2025-26: 86 लाख छात्रों ने छोड़े सरकारी स्कूल, सरकार की चुप्पी क्यों? क्या बदल जाएगी देश की शिक्षा व्यवस्था?

UDISE Report 2025-26: 86 लाख छात्रों ने छोड़े सरकारी स्कूल, सरकार की चुप्पी क्यों? क्या बदल जाएगी देश की शिक्षा व्यवस्था?
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Naresh Kumar

Jul 08, 2026

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UDISE+ Report 2025-26 में सरकारी स्कूलों से 86 लाख छात्रों के कम होने और प्राइवेट स्कूलों में 88 लाख नए दाखिलों का खुलासा हुआ है। हरियाणा में भी सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या घटी। क्या शिक्षा व्यवस्था बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

UDISE+ Report 2025-26 में सरकारी स्कूलों से 86 लाख छात्रों के कम होने और प्राइवेट स्कूलों में 88 लाख नए दाखिलों का खुलासा हुआ है। हरियाणा में भी सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या घटी। क्या शिक्षा व्यवस्था बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी UDISE+ Report 2025-26 ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट बताती है कि पिछले दो शैक्षणिक सत्रों में करीब 86 लाख छात्रों ने सरकारी स्कूलों से नामांकन हटाया, जबकि इसी दौरान 88 लाख से अधिक छात्रों ने प्राइवेट अन-एडेड स्कूलों में प्रवेश लिया। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक कारणों से बड़ी संख्या में बच्चे निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में आए थे। लेकिन महामारी के बाद हालात सामान्य होते ही बड़ी संख्या में अभिभावकों ने दोबारा निजी स्कूलों का रुख कर लिया। विशेषज्ञ इसे "रिवर्स माइग्रेशन" का प्रभाव मानते हैं।

हरियाणा में भी चिंता बढ़ी :

हरियाणा में भी स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार सरकारी स्कूलों में करीब 27 हजार छात्रों की कमी दर्ज की गई है। राज्य के 28 सरकारी प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है। वहीं, हरियाणा में 59.1% छात्र निजी अन-एडेड स्कूलों में पढ़ रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।

सरकार की चुप्पी क्यों?

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सरकारी स्कूलों में लगातार घटते नामांकन पर सरकार की क्या रणनीति है? अब तक सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान या नीति सामने नहीं आई है जिसमें यह कहा गया हो कि सरकारी स्कूल बंद किए जाएंगे। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान लंबे समय तक जारी रहा तो कई कम नामांकन वाले स्कूलों के विलय (Merger), पुनर्गठन या संसाधनों के पुनर्वितरण जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है। यह एक संभावित नीति विकल्प है, न कि घोषित निर्णय।

क्या बदल जाएगी शिक्षा व्यवस्था?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, डिजिटल संसाधन और अंग्रेजी माध्यम की बढ़ती मांग जैसे मुद्दों पर तेजी से काम करने की जरूरत है। यदि सरकारी स्कूलों में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में निजी शिक्षा की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। इसका असर गरीब और ग्रामीण परिवारों की शिक्षा तक पहुंच पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल, UDISE+ Report 2025-26 ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकारें इस चुनौती से निपटने के लिए क्या कदम उठाती हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

 

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