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सोनम वांगचुक को मेदांता शिफ्ट करने की सलाह, सरकार ने कहा- कोई आपत्ति नहीं

सोनम वांगचुक को मेदांता शिफ्ट करने की सलाह, सरकार ने कहा- कोई आपत्ति नहीं
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Naresh Kumar

Jul 21, 2026

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दिल्ली हाई कोर्ट ने अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता स्थानांतरित करने की सलाह दी। केंद्र सरकार ने भी इस पर सहमति जताई।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता स्थानांतरित करने की सलाह दी। केंद्र सरकार ने भी इस पर सहमति जताई।

अदालत ने वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की सलाह दी; सरकार ने कहा: 'कोई आपत्ति नहीं'

नयी दिल्ली,  दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 28 जून से अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने का  मंगलवार को परामर्श दिया।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एकल पीठ के रविवार के आदेश को चुनौती दी गई है। 

एकल पीठ ने सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक का किये जा रहे उपचार में दखल देने से इनकार कर दिया था।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किए जाने पर केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक को चिकित्सकीय सलाह के बिना मेदांता अस्पताल से छुट्टी की मांग नहीं करनी चाहिए।
 
मेहता ने कहा, ''मेदांता एक प्रतिष्ठित अस्पताल है। यदि उन्हें (वांगचुक को) वहां स्थानांतरित किया जाता है, तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं।''
सुनवाई के दौरान, पीठ ने सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक के उपचार की निगरानी कर रहे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों और जलवायु कार्यकर्ता के निजी चिकित्सक से भी बातचीत की। 

अदालत ने पाया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि वांगचुक को लगातार उपचार की जरूरत है।
पीठ ने कहा, ''हम उन्हें मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की सलाह देते हैं।''
अदालत ने यह भी कहा कि वह इस संबंध में भोजनावकाश के बाद आदेश पारित करेगी।
 
आंग्मो ने अपनी अपील में कहा है कि एकल न्यायाधीश का रविवार का आदेश बिना किसी गिरफ्तारी के ही वांगचुक को अवैध रूप से सफदरजंग अस्पताल में रहने के लिए बाध्य करता है और यह निर्देश देता है कि न तो वांगचुक और न ही उनकी पत्नी के पास उनके चिकित्सीय उपचार से संबंधित निर्णय लेने का अंतिम अधिकार है।

न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
उन्होंने कहा था सरकार द्वारा वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को मनमाना नहीं माना जा सकता। 

दिल्ली पुलिस शनिवार को वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से ''बलपूर्वक'' सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। इसके अगले दिन आंग्मो ने अदालत का रुख कर याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।

 

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