National
NEET 2026 AIR-1 आर्यन गुप्ता बोले: 'कैंसर से दादी को खोया, अब ऑन्कोलॉजिस्ट बनना चाहता हूं
N
Naresh Kumar
Jul 17, 2026
126 Views
NEET UG 2026 में 715/720 अंक हासिल कर AIR-1 बनने वाले आर्यन गुप्ता ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि वे रोज़ 16-17 घंटे पढ़ाई करते थे। बचपन में कैंसर से अपनी दादी को खोने के बाद उन्होंने ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बनने का संकल्प लिया था और अब उसी सपने को पूरा करना चाहते हैं।
NEET UG 2026 में 715/720 अंक हासिल कर AIR-1 बनने वाले आर्यन गुप्ता ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि वे रोज़ 16-17 घंटे पढ़ाई करते थे। बचपन में कैंसर से अपनी दादी को खोने के बाद उन्होंने ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बनने का संकल्प लिया था और अब उसी सपने को पूरा करना चाहते हैं।

'कैंसर से दादी को खोया, ऑन्कोलॉजिस्ट बनना चाहता हूं' : 2026 नीट-स्नातक के टॉपर आर्यन गुप्ता लुधियाना, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक 2026 में संयुक्त रूप से शीर्ष पर रहने वाले दो छात्रों में से एक लुधियाना निवासी आर्यन गुप्ता ने वरीयता सूची में अव्वल रहने पर खुशी जताई और कहा कि वह कैंसर रोग विशेषज्ञ बनना चाहते हैं।
हरियाणा के पांशुल बंसल के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान हासिल करने वाले गुप्ता (जिन्होंने 720 में से 715 अंक प्राप्त किए) ने बृहस्पतिवार को अपनी तैयारी के दौरान मिले अटूट सहयोग के लिए अपने माता-पिता को श्रेय दिया और बताया कि वे दिन में लगभग 16-17 घंटे पढ़ाई करते थे।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि इस साल कुल 11.21 लाख उम्मीदवार पुन: परीक्षा में सफल हुए हैं।
एजेंसी के मुताबिक, 690 से ज्यादा स्कोर करने वाले 138 उम्मीदवारों में से 93 प्रतिशत से अधिक पहली बार नीट-स्नातक परीक्षा में शामिल हुए थे, जबकि 19 उम्मीदवारों ने 700 स्कोर किया।
एनटीए के अनुसार, कुल 1,492 उम्मीदवारों ने 650 या उससे ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 10,160 उम्मीदवारों ने 600 या उससे ज्यादा अंक प्राप्त किए।
डॉक्टरों के परिवार से आने वाले गुप्ता ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 'ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) वन' हासिल करना "किसी सपने जैसा" लगता है।
उन्होंने कहा, "मेरे माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं। पूरा परिवार बहुत खुश है।"
उन्होंने कहा, "मैं दिन में 16-17 घंटे पढ़ाई करता था। कई दिन ऐसे भी होते थे जब मुझे नींद नहीं आती थी। लेकिन मैं लगा रहा क्योंकि मैंने अपने लिए एक लक्ष्य तय कर रखा था।"
कैंसर रोग विशेषज्ञ बनने की अपनी इच्छा के बारे में गुप्ता ने कहा, "मैं ऑन्कोलॉजिस्ट बनना चाहता हूं। जब मैं तीसरी कक्षा में था, तब कैंसर की वजह से मेरी दादी का निधन हो गया था। उसी दिन मैंने कसम खाई थी कि मैं इसी क्षेत्र में काम करूंगा।"
उन्होंने कहा, "ज़िंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है। लेकिन अभी मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं। यह कामयाबी मेरे माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी लोगों की है जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया।"
Related Story
जियो आईपीओ की शानदार शुरुआत
5 hours ago