Haryana Rajasthan Water Dispute : यमुना के पानी पर बड़ा फैसला! हरियाणा और राजस्थान में आखिर किसे हुआ फायदा और किसे नुकसान?
Naresh Kumar
Jun 23, 2026
Haryana Rajasthan Water Dispute : हरियाणा और राजस्थान के बीच जल समझौते पर सहमति बनी। Upper Yamuna River Board Agreement के तहत राजस्थान को मिलेगा पानी, बांध परियोजनाओं को भी मिली रफ्तार।
हरियाणा और राजस्थान के बीच लंबे समय से लंबित जल बंटवारे के मुद्दे पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान सरकार के प्रतिनिधियों ने जल संसाधन, सिंचाई और पेयजल से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
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बैठक के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि वर्ष 1994 के Upper Yamuna River Board Agreement के तहत राजस्थान को उसके हिस्से का पानी उपलब्ध कराने पर सहमति बन गई है। इस संबंध में दोनों राज्यों के बीच सोमवार को औपचारिक MOU (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
राजस्थान को मिलेगा उसके हिस्से का पानी
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला राजस्थान को उसके निर्धारित हिस्से का यमुना जल उपलब्ध कराने को लेकर लिया गया। यह निर्णय 1994 के अपर यमुना रिवर बोर्ड समझौते के अनुरूप लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों राज्यों के बीच जल प्रबंधन को लेकर बेहतर तालमेल स्थापित होगा और भविष्य में जल विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
बैठक में लंबे समय से लंबित Renuka Dam Project, Kishau Dam Project और Lakhwar Dam Project को तेजी से आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से:
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हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश को अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा।
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सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी।
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पेयजल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
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जल संरक्षण और प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
घग्गर नहर में गिरने वाले प्रदूषित पानी का होगा उपचार
बैठक में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। घग्गर नहर में गिरने वाले दूषित पानी के उपचार के लिए आधुनिक Water Treatment Plant स्थापित करने पर सहमति बनी।
इस कदम से:
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जल प्रदूषण में कमी आएगी।
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किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाला पानी मिलेगा।
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पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
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नहरों और जल स्रोतों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
नदियों में गंदे पानी के प्रवाह पर लगेगी रोक
बैठक में यह भी तय किया गया कि बिना शोधन (Untreated Water) के गंदे पानी को नदियों में छोड़ने पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य:
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नदियों की स्वच्छता बनाए रखना
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भूजल संरक्षण
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जल स्रोतों का पुनर्जीवन
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पर्यावरण संतुलन बनाए रखना
है।
हरियाणा के किसानों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार इन फैसलों का सबसे बड़ा फायदा हरियाणा और राजस्थान के किसानों को मिल सकता है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से कृषि उत्पादन में सुधार होगा और जल संकट वाले क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के सहयोग से जल प्रबंधन को और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, सिंचाई और पेयजल उपलब्धता सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
निष्कर्ष
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक में हरियाणा और राजस्थान के बीच जल बंटवारे, बांध परियोजनाओं और जल संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। राजस्थान को उसके हिस्से का पानी देने, रेणुका-किशाऊ-लखवार परियोजनाओं को गति देने और नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में यह बैठक एक बड़ा कदम मानी जा रही है।