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5 सितंबर को दिल्ली में छात्रों का बड़ा विरोध मार्च, आइसा ने दिया समर्थन
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Naresh Kumar
Aug 26, 2026
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NEET विवाद और छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकलेगा। आइसा ने आंदोलन को समर्थन देते हुए एफआईआर वापस लेने, पुलिस कार्रवाई की जांच और सरकार से छात्रों के मुद्दों पर जवाबदेही व संवाद की मांग की है।
NEET विवाद और छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकलेगा। आइसा ने आंदोलन को समर्थन देते हुए एफआईआर वापस लेने, पुलिस कार्रवाई की जांच और सरकार से छात्रों के मुद्दों पर जवाबदेही व संवाद की मांग की है।

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मुंबई, 26 ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के पांच सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च को समर्थन दिया है। इस मार्च में छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने और पिछले प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर पैलेट और गोलियां चलाए जाने की जांच कराने की मांग की जाएगी।
आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बुधवार को 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि छात्र आंदोलन को जन्म देने वाले मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पहले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद ये मामले अभी लंबित हैं।
उन्होंने कहा, ''सरकार को सभी मामले पूरी तरह वापस लेने चाहिए। पैलेट और गोलियां चलाए जाने की जांच होनी चाहिए और सरकार को इसके लिए पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।" वामपंथी छात्र नेता ने कहा, ''आइसा की नजर में यह मामला अब भी अनसुलझा है। सरकार ने खुद मामलों को वापस लेने का वादा किया था, लेकिन अब भी यह एक बड़ा मुद्दा है कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर मामले दर्ज हैं।''
अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र के साथ बातचीत के बाद करीब एक महीने तक आंदोलन स्थगित रखने के पश्चात अब शांतिपूर्ण आंदोलन फिर शुरू करने का ऐलान किया है।पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन प्रस्तावित इस मार्च का नेतृत्व उन छात्रों के परिवार करेंगे, जिन्होंने नीट परीक्षा रद्द होने और बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवार भी मार्च में शामिल होंगे।
नेहा बोरा ने पिछले महीने दिल्ली में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्न पत्र लीक के मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आम लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके साथ संवाद का रास्ता लगभग बंद कर दिया है इसलिए विरोध प्रदर्शन जरूरी हो गए हैं।
उन्होंने कहा, ''छात्र और युवा सड़कों पर क्यों उतरे और हम भी सड़कों पर क्यों आए, इसकी पूरी वजह यही थी कि इस सरकार ने आम लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके साथ संवाद का रास्ता लगभग बंद कर दिया है।''
बोरा ने कहा, ''हम ऐसे किसी भी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील आंदोलन या प्रदर्शन के साथ खड़े हैं, जो ऐसी सरकार से जवाबदेही की मांग करता है, जो लोगों की बात सुनने से इनकार कर रही है।'' उन्होंने झारखंड में कथित भर्ती परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था। नीट विवाद से प्रभावित परिवारों की भागीदारी पर आइसा अध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन शुरू होने के समय ही सरकार को उनकी चिंताओं को समझना चाहिए था।
उन्होंने आरोप लगाया, ''अगर यह सरकार प्रभावित लोगों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है, तो यह केवल उसकी अमानवीयता को दर्शाता है।'' बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी हैं और उनका छात्र संगठन भाकपा (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध है।
आंदोलन दोबारा शुरू होने पर सरकार की ओर से संभावित प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर बोरा ने कहा कि लोकतांत्रिक सरकार को संवाद की मांग कर रहे लोगों से बातचीत करनी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने कहा है उसे अभी तक पांच सितंबर के प्रस्तावित मार्च के लिए कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है और ऐसा कोई अनुरोध मिलने पर उसकी समीक्षा की जाएगी। इस पर बोरा ने कहा कि आइसा पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगा।
उन्होंने कहा, ''हम भी इंतजार करेंगे और देखेंगे कि पुलिस क्या कहती है। पहले भी कई प्रदर्शन पुलिस की अनुमति के बिना हुए हैं और हम उस लोकतांत्रिक सिद्धांत के पक्ष में हैं कि विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति जरूरी नहीं होनी चाहिए।''