Padma Shri 2026: पानीपत के खेम राज सुंद्रियाल को मिला देश का बड़ा सम्मान, जानिए क्यों हैं इतने खास
Naresh Kumar
Jun 23, 2026
Padma Shri 2026: पद्म श्री से सम्मानित हुए पानीपत के बुनकर गुरु खेम राज सुंद्रियाल, 10 हजार से ज्यादा युवाओं को सिखाई बुनाई की कला 
हरियाणा के लिए गर्व का क्षण है। पानीपत की हथकरघा (Handloom) और टेपेस्ट्री बुनाई कला को नई पहचान दिलाने वाले 83 वर्षीय खेम राज सुंद्रियाल को भारत सरकार ने पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में उन्हें कला क्षेत्र में आजीवन योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
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खेम राज सुंद्रियाल ने पिछले पांच दशकों से अधिक समय तक भारतीय पारंपरिक बुनाई कला को न केवल संरक्षित किया बल्कि उसे आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज पानीपत का हैंडलूम उद्योग जिस पहचान के साथ दुनिया भर में जाना जाता है, उसमें उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पानीपत हैंडलूम इंडस्ट्री को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
वर्ष 1975 में वीवर्स सर्विस सेंटर, पानीपत में आने के बाद खेम राज सुंद्रियाल ने स्थानीय बुनकरों के साथ मिलकर कई नए प्रयोग किए। उन्होंने पारंपरिक 'पानीपत खेस' को आधुनिक डिजाइनों, रंगों और नई तकनीकों से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया।
उनके प्रयासों से पानीपत के हैंडलूम उत्पादों की मांग विदेशों में बढ़ी और हजारों बुनकर परिवारों को रोजगार के नए अवसर मिले। आज पानीपत को भारत की "हैंडलूम सिटी" के रूप में पहचान दिलाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
'हत्ता तकनीक' से बदली दरी बुनाई की तस्वीर
खेम राज सुंद्रियाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक पंजा दरी लूम में 'हत्ता तकनीक' का सफल प्रयोग है। इस तकनीक ने दरी बुनने में लगने वाले समय और श्रम को काफी हद तक कम कर दिया।
इस नवाचार के कारण बुनकरों की उत्पादकता बढ़ी और कम समय में अधिक उत्पादन संभव हो पाया। आज भी कई बुनकर इस तकनीक का उपयोग कर बेहतर गुणवत्ता वाली दरियां तैयार कर रहे हैं।
ऊनी जामदानी बुनाई को दिया नया आयाम
जामदानी बुनाई कला परंपरागत रूप से सूती धागों तक सीमित थी। खेम राज सुंद्रियाल ने इस कला को ऊनी धागों पर उतारकर एक नई दिशा दी।
उनकी इस पहल से हिमाचल प्रदेश और अन्य पहाड़ी राज्यों के शॉल बुनकरों को नई तकनीक और नया बाजार मिला। इससे स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ी और पारंपरिक शिल्प को नई पहचान मिली।
10 हजार से अधिक युवाओं को दिया प्रशिक्षण
खेम राज सुंद्रियाल केवल एक कलाकार नहीं बल्कि एक महान शिक्षक भी हैं। उन्होंने देशभर में 10 हजार से अधिक युवाओं और पारंपरिक बुनकरों को बुनाई कला का प्रशिक्षण दिया है।
आज भी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्यार्थी पानीपत पहुंचकर उनसे डिजाइन और बुनाई के गुर सीखते हैं। उनके शिष्य देश के विभिन्न राज्यों में हैंडलूम उद्योग को आगे बढ़ा रहे हैं।
विष्णु हैंडलूम सहकारी समिति बनी बुनकरों का सहारा
सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने बुनकरों के लिए काम करना नहीं छोड़ा। उन्होंने विष्णु हैंडलूम सहकारी समिति की स्थापना की, जो आज सैकड़ों बुनकर परिवारों की आजीविका का आधार बनी हुई है।
यह समिति स्थानीय कारीगरों को रोजगार, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है।
संत कबीर पुरस्कार से लेकर पद्म श्री तक का सफर
खेम राज सुंद्रियाल के योगदान को पहले भी कई राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
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वर्ष 2001 में नेशनल मेरिट सर्टिफिकेट
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वर्ष 2009 में भारत सरकार का प्रतिष्ठित संत कबीर पुरस्कार
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वर्ष 2026 में पद्म श्री सम्मान
पद्म श्री सम्मान उनके पांच दशकों से अधिक समय तक किए गए समर्पित कार्य की राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी पहचान माना जा रहा है।
हरियाणा के लिए गर्व का विषय
पद्म श्री मिलने के बाद हरियाणा के कला और बुनकर समुदाय में खुशी की लहर है। सामाजिक संगठनों, कलाकारों और उद्योग जगत के लोगों ने इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया है।
खेम राज सुंद्रियाल की कहानी इस बात का उदाहरण है कि परंपरा और नवाचार का सही मेल न केवल कला को जीवित रख सकता है बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी भी बदल सकता है।
निष्कर्ष
पद्म श्री 2026 से सम्मानित खेम राज सुंद्रियाल ने भारतीय हथकरघा उद्योग को नई पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। पानीपत के हैंडलूम उद्योग को विश्व स्तर तक पहुंचाने, हजारों युवाओं को प्रशिक्षित करने और पारंपरिक बुनाई कला को आधुनिक स्वरूप देने के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।