Haryana News: हरियाणा के आरटीई के तहत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटें आरक्षित करना है अनिवार्य : शिक्षा मंत्री
Naresh Kumar
Apr 16, 2026
Haryana News: हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को कक्षा प्रथम एवं उससे पूर्व की कक्षाओं में वंचित एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इस संबंध में विभाग द्वारा निर्देश जारी किए गए थे कि सभी विद्यालय अपनी आरक्षित सीटों का विवरण विभागीय वेबसाइट एवं उज्ज्वल पोर्टल पर 11 मार्च से 20 मार्च 2026 तक अपलोड करें।
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उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुल 9230 निजी विद्यालयों में से 8621 विद्यालयों ने समय रहते पोर्टल पर सीटें घोषित कीं, जबकि 609 विद्यालयों ने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके अतिरिक्त सीटें घोषित करने वाले 8621 विद्यालयों में से 891 विद्यालय ऐसे पाए गए, जिन्होंने अपनी मान्यता से संबंधित आवश्यक दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड नहीं किए। इसी कारन उनकी प्रविष्टियां अस्वीकृत कर दी गईं हैं। इस लापरवाही के कारण विभाग द्वारा लगभग 1500 विद्यालयों का एमआईएस पोर्टल अस्थायी रूप से बंद किया गया।

शिक्षा मंत्री श्री ढांडा ने कहा कि इस विषय को लेकर निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने उनसे भेंट कर अवगत कराया कि सत्र 2026-27 की दाखिला प्रक्रिया जारी है, लेकिन एमआईएस पोर्टल बंद होने के कारण प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस पर गंभीरता से विचार करते हुए सरकार ने बच्चों और अभिभावकों के हित को सर्वोपरि मानते हुए एक संवेदनशील निर्णय लिया है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि जिन विद्यालयों का एमआईएस पोर्टल सीटें घोषित न करने या दस्तावेज अपलोड न करने के कारण बंद किया गया था, उन्हें अब पुनः खोलते हुए एक और अवसर प्रदान किया गया है। संबंधित विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्रता से अपनी मान्यता से संबंधित दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करें तथा आटीई अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों का विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक वंचित एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी निजी विद्यालयों को अधिनियम के प्रावधानों का पूर्णतः पालन करना होगा। उन्होंने स्कूल संचालकों से अपील की है कि वे नियमों की अनुपालना सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी पात्र बच्चे को शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहना पड़े।