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नेपाल सुरंग बचाव अभियान में जुटे अर्नोल्ड डिक्स, बोले- मुश्किल काम का मतलब असंभव नहीं
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Naresh Kumar
Sep 07, 2026
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सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स अब नेपाल में चिलिमे सुरंग के खोज अभियान में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि सिल्क्यारा ने सिखाया कि मुश्किल या कम संभव दिखने वाला काम असंभव नहीं होता।
सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स अब नेपाल में चिलिमे सुरंग के खोज अभियान में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि सिल्क्यारा ने सिखाया कि मुश्किल या कम संभव दिखने वाला काम असंभव नहीं होता।

काठमांडू, सात सितंबर भारत में 2023 में सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद करने वाले ऑस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने सोमवार को नेपाल में जारी जटिल खोज एवं बचाव अभियान के दौरान उस अनुभव को याद किया और कहा कि उस अभियान ने उन्हें यह सीख दी कि ''किसी काम के मुश्किल या बहुत कम संभव होने का मतलब यह नहीं होता कि वह असंभव है।''
ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ डिक्स शनिवार को नेपाल पहुंचे। 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चिलिमे जलविद्युत सुरंग के अंदर लोगों के फंसे होने की आशंका है। डिक्स इन लोगों की तलाश में मदद कर रहे हैं।
वह नेपाली और भारतीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर सुरंग की स्थिति का आकलन कर रहे हैं और भूमिगत पावरहाउस तक पहुंचने की योजना बना रहे हैं। आशंका है कि कुछ लोग इस भूमिगत पावरहाउस में शरण लिए हो सकते हैं।
चिलिमे में चलाया जा रहा खोज अभियान नेपाल में भोटेकोशी-त्रिशूली गलियारे में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चल रहे व्यापक राहत एवं बचाव अभियान का हिस्सा है। इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग लापता हैं।
डिक्स ने कहा कि नेपाल की मौजूदा स्थिति ने उन्हें उत्तराखंड के सिल्क्यारा अभियान की याद दिला दी, जहां नवंबर 2023 में सुरंग का एक हिस्सा ढहने के बाद 41 निर्माण श्रमिक फंस गए थे। कई एजेंसियों के संयुक्त अभियान के दौरान 17 दिन भूमिगत रहने के बाद सभी श्रमिकों को जिंदा बाहर निकाल लिया गया था। इस अभियान में बचावकर्मियों को कई बार उम्मीद और निराशा के बीच झूलना पड़ा था।
डिक्स ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में 2023 के बचाव अभियान का जिक्र करते हुए कहा, ''हमारे सामने एक ऐसा काम था, जो देखने में असंभव लग रहा था- उन्हें जिंदा घर वापस लाना। हमने मिलकर उस परीक्षा को पास किया।''
सिल्क्यारा में बचावकर्मी आखिरकार 60 मीटर लंबे एक निकासी मार्ग के जरिए सुरंग में फंसे श्रमिकों तक पहुंचे थे। इसके लिए 'रैट-होल' खनन विशेषज्ञों ने मलबे के अंतिम हिस्से को हाथ से खोदा था। इसके बाद श्रमिकों को एक-एक करके स्टील की पाइपनुमा निकासी सुरंग के जरिए बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया।
डिक्स ने कहा कि नेपाल में चल रहा अभियान अलग है, क्योंकि यहां बचावकर्मियों को एक ही समय में कई संभावित बचाव स्थलों पर काम करना पड़ रहा है। उन्होंने लिखा, ''यह सिर्फ एक बचाव अभियान नहीं है, बल्कि एक साथ कई संभावित बचाव अभियान हैं, जो अलग-अलग स्थानों पर एक ही समय में चल रहे हैं। हर स्थान पर अपने खतरे, अनिश्चितताएं और ऐसी जिंदगियां हैं, जिन्हें अब भी बचाया जा सकता है।''
सिल्क्यारा के अपने अनुभव को याद करते हुए डिक्स ने कहा कि एक मुश्किल बचाव अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर लेना इस बात का संकेत नहीं है कि चुनौतियां खत्म हो गई हैं। उन्होंने कहा, ''सिल्क्यारा ने मुझे सिखाया कि संभव न लगने वाले काम को कभी असंभव नहीं समझना चाहिए।''
'द काठमांडू पोस्ट' अखबार के अनुसार, इस अभियान ने डिक्स को उन भारतीय कर्मियों के साथ फिर काम करने का मौका भी दिया है, जिनके साथ उन्होंने सिल्क्यारा बचाव अभियान के दौरान काम किया था। इनमें कर्नल परीक्षित मेहरा भी शामिल हैं, जो नेपाल में तैनात भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रविवार को कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय और नेपाली तकनीकी टीम चिलिमे सुरंग के अंदर लगातार काम कर रही हैं। सुरंग तक पहुंच सीमित है और वहां कीचड़ तथा भारी मलबा मौजूद है।
श्रीवास्तव ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''सीमित और मुश्किल पहुंच, कीचड़ और भारी मलबे जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारतीय और नेपाली संयुक्त तकनीकी टीम सुरंग के अंदर कड़ी मेहनत के साथ लगातार आगे बढ़ रही है।''
उन्होंने बताया कि अधिक कर्मियों को सुरंग तक पहुंचाने की सुविधा के लिए स्याफ्रुबेसी से सुरंग तक रस्सियों के जरिए संपर्क मार्ग स्थापित करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। सुरंग की ओर जाने वाली अस्थायी सड़क बनाने का काम भी जारी है और अब तक करीब 950 मीटर रास्ता साफ किया जा चुका है।
डिक्स ने कहा कि नेपाल में चल रहा अभियान बचाव दलों की इस प्रतिबद्धता की भी परीक्षा है कि वे परिणाम को लेकर अनिश्चितता के बावजूद अपना काम जारी रख सकते हैं या नहीं। उन्होंने लिखा, ''उम्मीद को अनुशासन में बदलना होगा, करुणा को कार्रवाई में बदलना होगा और कर्तव्य की भावना सफलता की निश्चितता पर निर्भर नहीं हो सकती।''