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Editorial

खुद पर भरोसा रखिए, असाधारण बनने की शुरुआत यहीं से

खुद पर भरोसा रखिए, असाधारण बनने की शुरुआत यहीं से
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Naresh Kumar

Oct 05, 2026

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दूसरों से अपेक्षा नहीं, अपनी क्षमता पर विश्वास ही सफलता और सकारात्मक बदलाव की असली कुंजी है।

दूसरों से अपेक्षा नहीं, अपनी क्षमता पर विश्वास ही सफलता और सकारात्मक बदलाव की असली कुंजी है।

खुद पर भरोसा तो रखें

क्या धरती पर दो तरह के व्यक्ति होते हैं। एक साधारण और दूसरे असाधारण। शायद! ऐसा नहीं है क्योंकि ईश्वर सभी को हर तरह से एक-सा बनाता है। यह सही है कि एक दूसरे व्यक्ति की आपस में प्रकृति-प्रवृति नहीं  मिलती। लेकिन एक बात ध्यान रखिए कि जिन्हें हम असाधारण व्यक्ति मानते हैं, उनमें अलग से क्या होता है?

सम्भवत: कुछ भी है। साधारण लोगों की तरह ही सब कुछ करते हैं पर उनके कर्मों के कारण वे असाधारण कहलाते हैं। इसका जवाब है कि असाधारण लोगों का खुद पर अटूट विश्वास होता है। अपने आप पर विश्वास रखने वाले ही इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अपना नाम अंकित पर पाते हैं। अपने कार्यों को दूसरों के ऊपर टालने की प्रवृत्ति आपके स्वावलंबन को नष्ट कर देती है।

आप जब-जब किसी काम को स्वयं ना कर दूसरों से अपेक्षा रखते हैं तब-तब आपकी कार्य क्षमता प्रभावित होती है और आप वो बनने से चूक जाते हैं, जो आप बन सकते थे। अपेक्षा यदि दूसरों से की जाती है तो वह कष्टदायी होती है और अपेक्षा यदि स्वयं से की जाती है तो वह प्रतिभा बन जाती है। जगत में किसी का प्रेम कभी कम नहीं होता अपितु हमारी अपेक्षाएं अधिक हो जाती हैं।

स्वयं की शक्ति का विस्मरण कर दूसरों से रखी गई अपेक्षा व्यक्ति के लिए सदैव घातक सिद्ध होती है। तुम अपनी क्षमताओं पर विश्वास तो करो, वाकई तुम साधारण नहीं, असाधारण हो। जीवन में इस बात विशेष ध्यान रखें कि चिंतन और संग सदैव श्रेष्ठ का ही किया जाए।

दुनिया में ऐसे व्यक्ति बहुत हैं, जो विकृत चिंतन और संग करके अपनी बुद्धि व अपना समय दोनों ही नष्ट करने में लगे रहते हैं। श्रेष्ठ चिंतन और संग से मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दुनिया में ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जिनका पूर्व जीवन दुष्प्रवृत्तियों से भरा रहा लेकिन कालांतर में श्रेष्ठ संगति और सात्विक वातावरण से उन्होंने स्वयं का उत्थान किया और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सके। उचित मार्गदर्शन, उचित समय पर और उचित व्यक्ति के द्वारा मिले तो परिणाम भी श्रेष्ठ निकलता है। सत्प्रवृत्तियां सकारात्मक परिवेश में ही जन्म लेती हैं।

यदि परिस्थितियाँ आप पर हावी हो रही हैं तो असहाय मत बनो। अच्छा साहित्य,सत्संग और श्रेष्ठ चिंतन को अपना साथी बनाओ। निरंतर सुपथ की ओर अग्रसर बने रहने का दृढ़ संकल्प लो,जीवन में प्रत्येक शिखर की यात्रा का प्रारंभ शून्य से ही होता है।इसलिए खुद पर सदैव भरोसा बनाए रखिए और इतिहास गढ़ने की ओर निरंतर बढ़ते रहिए।

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