ईरान पर ट्रंप का बयान, जमुई की घटना और गिरफ्तारी के अधिकार पर सवाल
Naresh Kumar
Sep 22, 2026
इस टिप्पणी में ईरान को लेकर ट्रंप के बयान, जमुई में नाबालिगों से कथित बदसलूकी और गिरफ्तारी के कारण बताए जाने के अधिकार समेत सामाजिक व कानूनी मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं।

बोलो- ईरान को कब तबाह करूं!
जब किसी भी व्यक्ति की वैचारिक क्षमता खत्म हो जाए तब उसकी तार्किक शक्ति भी खत्म हो जाती है और उसकी पहचान यह है कि एक तो वह आपे से बाहर हो जाता है और उल-जलूल बातें करता है, बीपी हाई होने लगता है, शरीर कांपने लग जाता है, अमानवीय निर्णय लेने लगता है। तभी तो ताऊ ट्रम्प का बयान आया है कि-बोलो ईरान को कब तबाह कर दूं,
बयान से ऐसे लगता है कि जैसे ट्रम्प खुद खुदा हो गए हैं और जब चाहे दुनिया को तबाह कर सकते हैं? कुछ-कुछ ऐसा ही हमारे देश के नेता लोग भी मानने लगे हैं तभी तो सारे नेता मुद्दों से भटककर इधर-उधर की बहुत बातें करते हैं और हकीकत से बावस्ता होना ही नहीं चाहते क्योंकि हकीकत से बावस्ता होना, उन्हें आईना दिखता है।
खैर, नेता तो नेता, यहां तो नेताओं के चमच्चों ने भी खुद को खुदा समझा हुआ है और वे भी मानसिक रूप से दिवालिए हो चुके हैं, उनकी भी समझने-सोचने की शक्ति काफूर हो चुकी है, तभी तो सोशल मीडिया पर कैसी-कैसी भाषा का प्रयोग करते हैं?
सोशल मीडिया को भी छोड़ दें तो आम जीवन में भी यही बात मिलती है। यदि कोई भी सभ्य व्यक्ति, संवेदनशील व्यक्ति जो जाति-धर्म की संकीर्णताओं से ऊपर उठ चुका हो, वह देखता होगा होगा तो यकीन मानिए वह कह उठेगा कि समाज में इस कदर वैमनस्य हमें किधर ले जा रहा है? और हैरत तो तब होती है जब इसमें विशेष रूप से टारगेट एक विशेष समुदाय को बनाया जाता है और जिस समुदाय को बनाया जाता है, वह उसी का अंग है बस उसका दलित होना, शोषित होना, पीड़ित होना गुनाह है, एससी-एसटी होना गुनाह है।
यह सब जाति के कारण होता है। बेशक कोई बड़ी नौकरी पर हो या कुछ और बस जाति के नाम पर दमन होता रहता है। आखिर कब सुधरेंगे हम और हमारा समाज, क्या ऐसे बनेंगे हम विश्व गुरु और ऐसे नाम होगा हमारा रोशन?
बिहार की एक घटना खबरों में है, बेहद हैरान करने वाली घटना है और घटना यह है कि बिहार के जमुई में एक छात्रा अपने दोस्त के साथ कहीं जा रही थी कि कुंठित लोगों ने उस लड़की के साथ जो व्यवहार किया है, वह पूरी मानव जाति को शर्मसार करने वाला है, यह कौन सा तरीका हुआ भाई सभ्य समाज का...क्या किया जाए ऐसे लोगों का क्योंकि ऐसे लोग सॉइको हैं, सिरफिरे हैं और ऐसे लोग अच्छी तरह जानते हैं कि कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि कमी कानून में नहीं बल्कि कमी व्यवस्था में और व्यवस्था में कौन लोग विराजमान हैं?
ठीक नहीं है यह सब, बहुत भयावह है, बदलिए इसे समय रहते वरना...इसमें भी एक गजब की बात यह है कि बहुत सारे मामले तो प्रकाश में ही नहीं आते क्योंकि हर तरह का डर होता है। ये पक्षपाती नजरिया त्यागिए, गलत को गलत कहने की हिम्मत कीजिए, सच बोलने का साहस कीजिए अन्यथा इसी पीड़ा को एक दिन आप भी भुगतेंगे।
अजी! कमाल करते हो, ऐसा कैसे हो सकता है मी लार्ड कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी की वजह बताई जाएं, यहाँ रूल आॅफ लॉ कब फॉलो होता है लेकिन फिर भी भला हो आपका मी लार्ड कि आपने यह निर्णय दिया कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पूर्व उसे उसकी वजह बताई जानी चाहिए पर मी लार्ड कभी नीचे उतरकर व्यवस्था का जायजा तो लीजिए, यहाँ तो पता नहीं क्या-क्या हो रहा है?
लेकिन फिर भी आप द्वारा दिया गया निर्णय किसी की आत्म का तो जरूर झकझोरेगा ताकि कुछ सुधार हो। चलते-चलते सिर्फ इतनी बात और कि देश की तमाम पार्टियों और तमाम नेताओं को अब देश के मूल मुद्दों को लेकर जरूर सोचना चाहिए वरना बहुत देर हो जाएगी क्योंकि यह जरूरी है, वरना कुंठित लोगों की संख्या बढ़ रही है और आप सब समझदार हैं ही।