स्टारलिंक विवाद: एलन मस्क ने अंबानी पर साधा निशाना
Naresh Kumar
Oct 10, 2026
स्टारलिंक विवाद: एलन मस्क ने रिलायंस से जुड़ी कंपनियों के भाजपा को राजनीतिक चंदे की खबरें साझा कीं

नई दिल्ली। अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क और रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी के बीच भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक (Starlink) को लेकर विवाद चर्चा में है। मस्क ने शनिवार को सोशल मीडिया पर मीडिया रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट साझा किए, जिनमें रिलायंस समर्थित कंपनियों द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सोशल मीडिया अभियानों में मदद करने और चुनावी बॉण्ड के जरिए राजनीतिक चंदा देने संबंधी दावे किए गए थे।
एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (X) पर समाचार वेबसाइट अल जजीरा की वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट साझा की। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रिलायंस द्वारा वित्तपोषित एक कंपनी ने फेसबुक पर भाजपा के राजनीतिक अभियानों में मदद की थी। मस्क ने इसके साथ ही अंग्रेजी दैनिक द इंडियन एक्सप्रेस की वर्ष 2024 की एक रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें चुनावी बॉण्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे का विवरण प्रकाशित किया गया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस से जुड़ी एक कंपनी ने चुनावी बॉण्ड के जरिए भाजपा को 385 करोड़ रुपये और शिवसेना को 25 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। मस्क द्वारा इन पुरानी खबरों को दोबारा साझा किए जाने के बाद स्टारलिंक और रिलायंस के बीच प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, साझा की गई रिपोर्टों में लगाए गए दावों को मस्क के स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत में लगातार हो रही देरी को लेकर एलन मस्क ने मुकेश अंबानी की आलोचना की है। मस्क ने शुक्रवार शाम इन रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट साझा किए थे। इससे कुछ घंटे पहले उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में मुकेश अंबानी को 'प्रधानमंत्री अंबानी' कहकर संबोधित किया था और उन पर बाजार में एकाधिकार बनाए रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
मस्क ने सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या मुकेश अंबानी भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा की अनुमति देने पर विचार करेंगे? उनकी इस टिप्पणी ने देश में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं, बाजार प्रतिस्पर्धा और निजी कंपनियों की भूमिका को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।
इस बीच, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने कहा कि एक विशेष कंपनी को लेकर काफी चर्चा हो रही है, लेकिन देश में तीन कंपनियों को उपग्रह संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस दिए जा चुके हैं।
सिंधिया ने बताया कि सैटेलाइट संचार सेवाओं का लाइसेंस प्राप्त करने वाली प्रत्येक कंपनी को सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी। इन शर्तों का पालन करने के बाद ही कंपनियों को देश में अपनी सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
स्टारलिंक विवाद के बीच सरकार के इस स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत के लिए लाइसेंस के साथ सुरक्षा नियमों का पालन भी अनिवार्य है। वहीं, मस्क की ओर से साझा की गई राजनीतिक चंदे से जुड़ी पुरानी मीडिया रिपोर्टों ने इस व्यावसायिक विवाद को राजनीतिक चर्चा से भी जोड़ दिया है।