RAJYASABHA NEWS: संसदीय इतिहास में बना महा-रिकॉर्ड! हरिवंश नारायण सिंह की हैट्रिक, देश के पहले ‘मनोनीत’ राज्यसभा उपसभापति बने
Naresh Kumar
Apr 17, 2026
RAJYASABHA NEWS: भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में आज का दिन यानि 17 अप्रैल 2026 स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। वरिष्ठ पत्रकार से राजनेता बने हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार निर्विरोध राज्यसभा के उपसभापति चुने गए हैं। इस जीत के साथ ही हरिवंश नारायण सिंह ने एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है जो आज तक भारत के किसी सांसद के पास नहीं था। दरअसल वह देश के पहले ऐसे मनोनीत सांसद बन गए हैं, जो सदन के इस गरिमामयी संवैधानिक पद पर आसीन हुए हैं।
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निर्विरोध निर्वाचन: विपक्ष ने नहीं उतारा उम्मीदवार
आपको बता दें कि आज सुबह 11 बजे राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही उनके निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की गई। NDA की ओर से सदन के नेता जेपी नड्डा ने हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन सांसद एस. फांगनोन कोन्याक ने किया। विपक्षी खेमे (INDIA गठबंधन) ने चुनाव का बहिष्कार किया और कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा, जिससे हरिवंश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
क्यों खास है हरिवंश ‘3.0’ का कार्यकाल?
हरिवंश नारायण सिंह के इस बार के निर्वाचन में कई चौंकाने वाले और ऐतिहासिक पहलू शामिल हैं:
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मनोनीत सदस्य के रूप में ताजपोशी: उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था। 10 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। यह पहली बार है जब कोई मनोनीत सांसद उपसभापति बना है।
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हैट्रिक का रिकॉर्ड: यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है। इससे पहले वह 2018 और 2020 में भी इस पद के लिए चुने गए थे।
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पूर्व CJI की सीट पर वापसी: उन्हें पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हुई सीट पर उच्च सदन में भेजा गया है।
PM मोदी ने दी बधाई: “सदन की ताकत और भी असरदार हुई”
हरिवंश की जीत पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में कहा, “लगातार तीसरी बार चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि सदन को आपके अनुभव पर कितना गहरा भरोसा है। हरिवंश जी न केवल सदन की कार्यवाही का कुशलता से संचालन करते हैं, बल्कि अपनी बारीकियों से सदन को समृद्ध भी करते हैं। मुझे विश्वास है कि उनका यह कार्यकाल सदन की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।”

विपक्ष का बहिष्कार: व्यक्ति नहीं, नीतियों का विरोध
जहां एक तरफ सत्ता पक्ष जश्न मना रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया का बहिष्कार किया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध हरिवंश जी के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार की ‘असंसदीय परंपराओं’ के खिलाफ है। विपक्ष का मुख्य मुद्दा यह है कि लोकसभा में पिछले सात वर्षों से ‘उपाध्यक्ष’ (Deputy Speaker) का पद खाली पड़ा है। विपक्ष ने उम्मीद जताई कि “हरिवंश 3.0” के दौरान विपक्ष की आवाज को अधिक तवज्जो दी जाएगी।
पत्रकारिता से राजनीति के शिखर तक: हरिवंश का सफर
आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार रह चुके हरिवंश नारायण सिंह की पहचान एक गंभीर और निष्पक्ष पत्रकार के रूप में रही है। सदन के भीतर अपने संयमित आचरण और सभी दलों को साथ लेकर चलने की कला के कारण ही वह आज इस ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचे हैं