जन्माष्टमी 2026: 90 साल बाद बन रही द्वापर युग जैसी ग्रह स्थिति, 4 सितंबर को दुर्लभ जयंत योग
Naresh Kumar
Sep 02, 2026
ज्योतिषाचार्य राममेहर शास्त्री के अनुसार इस बार 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र सहित कई विशेष योगों का संयोग बनेगा। उनका दावा है कि ऐसी ग्रह स्थिति करीब 90 वर्षों बाद बन रही है और इससे पहले 1936 में ऐसा संयोग बना था। इस बार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि में चंद्रमा और अर्धरात्रि काल सहित छह तत्वों का दुर्लभ मिलन भी बताया गया है।

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इस बार जन्माष्टमी पर बन रही है द्वापर युग में भगवान के वास्तविक जन्म के समय जैसी ग्रह स्थिति : राममेहर शास्त्री 90 वर्षों बाद बन रही है ऐसी स्थिति, इससे पहले ऐसी स्थिति 1936 में बनी थी
हिसार। ऋषि नगर स्थित विश्वकर्मा मंदिर के पुजारी एवं राष्ट्रीय ब्राह्मण महा संस्था के पूर्व जिला अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया श्रीमद् भागवत भविष्यादि पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र एवं वृष के चंद्रमाकालीन अर्द्धरात्रि के समय हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर्व 4 सितंबर रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ जयंत योग बन रहा है
जो कि यह बहुत ही खास और शुभ है। उन्होंने बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार मध्य रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय जो ग्रह स्थिति बनी थी ठीक वैसे ही ग्रह स्थिति अबकी बार बन रही है, जो द्वापर युग में भगवान के वास्तविक जन्म के समय बनी थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भाद्रपद कृष्ण अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का संयोग मध्य रात्रि निशीथकाल एक साथ मिलता है तो उसे जयंत योग कहा जाता है।
इस बार जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र के साथ हर्षण योग, व्रज योग, सर्वार्थ सिद्ध योग का एक साथ मिलन हो रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार ग्रहों की ऐसी अनुकूल स्थिति और विशेष धन योग 90 वर्षों बाद बन रहा है। इससे पहले ऐसी स्थिति 1936 में बनी थी। शास्त्री ने बताया इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस जन्माष्टमी को योगीराज भगवान श्री कृष्ण 5253 वर्ष के हो जाएंगे।
छह तत्वों का एक साथ होगा मिलन राममेहर शास्त्री ने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है कि जन्माष्टमी पर 6 तत्वों का एक साथ मिलना बहुत ही दुर्लभ होता है जो इस जन्माष्टमी पर छह तत्वों का मिलन हो रहा है। ये छह तत्व इस प्रकार हैं, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अर्धरात्रिकालीन अष्टमी रोहिणी नक्षत्र वृष राशि में चंद्रमा शुक्रवार का दिन आदि। इस बार अद्भुत संयोग बना है, यह सभी छह तत्वों 4 सितंबर की अर्धरात्रि में मौजूद रहेंगे। 3 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो जाएंगी अष्टमी
अगले दिन 4 सितंबर की रात 12:16 मिनट तक मौजूद रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का प्रारंभ होगा। अगले दिन गोगा नवमी का त्यौहार मनाया जाएगा। इन संयोगों को लेकर धार्मिक विषयों के जानकारो एवं ज्योतिषविद इस जन्माष्टमी को बहुत ही शुभ और उत्तम मान रहे हैं क्योंकि इस जन्माष्टमी पर त्रिग्रही योग भी बन रहा है। सूर्य की सिंह राशि में सूर्य, बुध और केतू तीनों ग्रह एक ही साथ बैठे हैं, यह बहुत ही शुभ होता है। आचार्य ने बताया कि इस वर्ष जन्माष्टमी व्रत प्रारंभ करना भी उत्तम रहेगा जो लोग पहले से कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कर रहे हैं उनके लिए यह व्रत अति उत्तम रहेगा। जो स्त्री-पुरुष पुत्र की कामना के लिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत करते हैं इनकी मनोकामना भगवान श्रीकृष्ण थोड़े ही समय में पूर्ण करते हैं। भक्त अपनी जो भी मनोकामना लेकर भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करता है, भगवान उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।
श्रीकृष्ण जन्म से पहले होंगे चन्द्रदेव के दर्शन इस बार स्मार्त और वैष्णव दोनों ही संप्रदायों के लोगों के लिए 4 सितंबर शुक्रवार को व्रत करना उत्तम रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले ही हिसार में रात 11: 29 मिनट पर चंद्रदेव के भी दर्शन हो जाएंगे। श्री कृष्ण का जन्म माता देवकी के गर्भ से मथुरा में धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। भगवान श्री कृष्ण मथुरा में 11 वर्ष एक महीना 22 दिन रहे थे। धार्मिक और ज्योतिषीय शोध के अनुसार श्री कृष्ण का अवतरण लगभग 5253 वर्ष पहले द्वापर युग में हुआ था।
धरती पर उनकी लीलाओं और ग्रंथों के आधार पर उनकी कुल आयु लगभग 125 वर्ष मानी गई है। धर्म ग्रंथो के अनुसार महाभारत युद्ध के करीब 36 साल बाद लगभग 3102 ईस्वी में उन्होंने भौतिक देह त्याग कर परलोक गमन किया था।