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आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, 17 नवंबर को अगली सुनवाई

आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, 17 नवंबर को अगली सुनवाई
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Naresh Kumar

Oct 14, 2026

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दुष्कर्म मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार नहीं किया। वकील ने दिल का दौरा पड़ने की जानकारी दी।

आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार; 17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को स्वयंभू प्रवचनकर्ता आसाराम की जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। आसाराम ने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए 2013 के गांधीनगर दुष्कर्म मामले में जमानत देने से इनकार करने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 85 वर्षीय आसाराम के वकील को जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। पीठ ने कहा कि आसाराम को जोधपुर में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय पहले ही 26 अक्टूबर तक पैरोल दे चुका है।

आसाराम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि आसाराम को मंगलवार रात दिल का दौरा पड़ा था और उसे गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया है।

गौरतलब है कि आसाराम को जोधपुर और गांधीनगर में दर्ज दुष्कर्म के दोनों मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

उच्चतम न्यायालय आसाराम की दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। पहली याचिका गुजरात के दुष्कर्म मामले में अंतरिम जमानत से संबंधित थी, जबकि दूसरी याचिका राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखने के फैसले के खिलाफ अपील थी।

जोधपुर में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखने के राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि आसाराम के आत्मसमर्पण करने के बाद अदालत कानून के एक स्पष्ट प्रश्न पर सुनवाई करेगी।

पीठ ने कहा कि अदालत साक्ष्यों और मामले के रिकॉर्ड की पड़ताल कर चुकी है और फिलहाल अपील में कोई ठोस आधार नजर नहीं आता।

आसाराम के वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को अन्य आरोपों में दोषी ठहराया जा सकता है, लेकिन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उनके अनुसार यह आरोप बनता ही नहीं है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ''हमें पक्षकारों के वकीलों ने बताया है कि दोषी याचिकाकर्ता पैरोल पर है। उसे 20 दिन की पैरोल दी गई है।''

अदालत ने स्पष्ट किया कि पैरोल की अवधि समाप्त होने और आसाराम के आत्मसमर्पण करने के बाद उसकी अपील पर आगे सुनवाई की जाएगी। पीठ ने मामले को 17 नवंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने रजिस्ट्री को अधीनस्थ अदालत में चले मुकदमे से संबंधित डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया, ताकि अगली सुनवाई के दौरान संबंधित दस्तावेज उपलब्ध रहें।

सुनवाई की शुरुआत में अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने बताया कि राजस्थान के मामले में उच्चतम न्यायालय की एक अन्य पीठ पहले ही नोटिस जारी कर चुकी है और वर्तमान पीठ के समक्ष यह अपील पहली बार सूचीबद्ध हुई है।

राजस्थान और गुजरात की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम को राजस्थान और गुजरात, दोनों राज्यों में दोषी ठहराया गया है। उन्होंने कहा कि आसाराम ने स्वास्थ्य कारणों से पैरोल के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे पहले खारिज कर दिया गया था।

मेहता ने बताया कि पैरोल याचिका खारिज होने के बाद आसाराम ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। इसके बाद उसने राजस्थान उच्च न्यायालय में एक और याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने उसे 20 दिन की पैरोल प्रदान की।

फिलहाल आसाराम पैरोल पर है और उच्चतम न्यायालय ने उसकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पैरोल समाप्त होने और आत्मसमर्पण के बाद ही अपील पर आगे विचार किया जाएगा।

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