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Editorial

सपने टूटते हैं, हकीकत जिंदगी का मतलब समझाती है

सपने टूटते हैं, हकीकत जिंदगी का मतलब समझाती है
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Naresh Kumar

Sep 30, 2026

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बीता हर लम्हा एक सपने जैसा है; उसे छोड़कर वर्तमान की खुशियों के साथ जीना ही जिंदगी है।

बीता हर लम्हा एक सपने जैसा है; उसे छोड़कर वर्तमान की खुशियों के साथ जीना ही जिंदगी है।

सपने भी समझाते हैं हकीकत जिंदगी की

सपना क्या है?मात्र कुछ देर की हकीकत और जैसे ही सपना टूटता है फिर वास्तविक हकीकत।बस यही सच है।सपने में कोई राजा बन सकता है,तो कोई  भिखारी बन सकता है।लेकिन हकीकत मात्र सपने तक है,जैसे ही सपना टूटा तैसे ही राजा,राजा नहीं होता और भिखारी,भिखारी नहीं होता बल्कि वो जो हकीकत में होते हैं, वही होते हैं यानि कि यदि सपने से पहले राजा था,तो सपने में बेशक भिखारी बन जाए मगर जैसे ही सपना टूटेगा,तैसे हो वो राजा ही होगा और यदि कोई हकीकत में भिखारी है और सपने में राजा बन गया,तो जैसे ही सपना टूटेगा,तैसे ही वह भिखारी ही होगा।लेकिन यहाँ सपनों की बात नहीं हो रही,जो खुली आँखों से देखे जाते हैं,ऐसे सपने जो खुली आँखों से देखे जाते हैं,उन्हें तो हर कोई पूरा करने के लिए अपना सर्वस्व लगाता है।

किसी के सपने पूरे हो जाते हैं तो किसी के तमाम प्रयासों के बाद अधूरे रह जाते हैं।यहाँ उन सपनों की बात हो रही है जो हम अक्सर रात में सोते समय बंद आँखों से देखते हैं।तो क्या है इसका प्रतीकात्मक अर्थ...प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि जिंदगी में बीतने वाला हर लम्हा भी एक सपना है और जैसे ही एक लम्हा बिता,तो बीतने के बाद वह लम्हा समाप्त समझिए क्योंकि वह फिर दोबारा आने वाला नहीं है और यदि कोई भी व्यक्ति उस लम्हे को ही जिंदगी मान बैठे,तो यकीनन वह बैठे ठाले दुखों को आमंत्रण दे रहा है

क्योंकि इसे यों समझिए कि एक सपना था,जो टूटा और सपना वाला तमाम दृश्य समाप्त।बस इतनी सी हकीकत है जिंदगी की,इसलिए यह हमेशा याद रखिए कि समंदर में से एक कतरा यदि अलग हो जाए,तो समंदर को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता और कतरे का कोई अस्तित्व नहीं बचता।

दूसरा एक उदाहरण और समझिए कि यदि फूलों के हरे-भरे सुगंधित बगीचे से,जिसमें तरह-तरह के फूल हों,उनमें से एक फूल खुद को अलग कर ले तो यकीनन बगीचे को कोई असर नहीं होगा मगर एक फूल जिसने खुद को अलग किया है,या हो गया है,उसका अपना अस्तित्व जरूर खतरे में पड़ जाएगा।

यकीन मानिए यदि आपके/हमारे जीवन से भी एक कतरा चला गया है तो उसे जाने दें क्योंकि कतरे ने खुद को खोया है न कि आपने और ठीक ऐसे ही यदि आपके जीवन से कोई फूल चला गया है तो यकीन मानिए वही पूरी जिंदगी नहीं था,जिंदगी में आप खुद भी आते हैं,आपकी निजी खुशियाँ भी आती हैं।उनके साथ आनंद लेना सीखिए क्योंकि सपने बेशक सपने होते हैं पर आदमी को हकीकत जरूर समझा जाते हैं।

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